2014 के नारे 2018 तक खोखले साबित हो गए हैं, 2019 में कौन सा नया झांसा देंगे पीएम मोदी ?

2014 के नारे 2018 तक खोखले साबित हो गए हैं, 2019 में कौन सा नया झांसा देंगे पीएम मोदी ?

लोकसभा चुनाव के वक़्त कुछ ऐसे नारे थे जिन्हें लेकर पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की मार्केटिंग की गई थी। जिनमें अंत मोदी सरकार को जोड़ दिया जाता था। मगर सवाल उठता है जनता, बीजेपी या मोदी सरकार के उन नारों पर भरोसा करेगी जो उसे ठीक चार साल पहले गढ़ा गया था।

क्योकि जितने भी नारे बीजेपी ने दिए सबके सब न की सिर्फ खोखले साबित हुए बल्कि उस नारे के बिलकुल उलट काम भी बीजेपी सरकार ने ही किया।

बीजेपी के उन नारों पर अगर नज़र डाले तो उनमें महंगाई को कम करने का सपना दिखाया गया। बीजेपी में सत्ता में आने से पहले महंगाई कम करने को नारा दिया गया था जिसमें कहा गया कि ‘बहुत हुई देश में महंगाई की मार’।

हालाकिं महंगाई के मोर्चे पर सरकार को लगातार बैकफुट पर रही है। मई में आई खुदरा महंगाई के बढ़ी है। मई में रिटेल महंगाई दर यानि सीपीआई बढ़कर 4.87 फीसदी पर पहुंच गई।

बहुत हुई जनता पर पेट्रोल-डीजल की मार – मोदी सरकार अपने चार साल पूरे कर चुकी है। जिसमें पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर कहा गया बहुत हुई जनता पर पेट्रोल-डीजल की मार अबकी बार मोदी सरकार। मगर मौजूदा वक़्त में आम जनता पेट्रोल 75.55 रुपये प्रति लीटर चुका रही है वही डीजल 67.38 रुपये पहुँच चुका है।

बहुत हुआ नारी पर वार – इस नारे पर नरेंद्र मोदी ने खूब राजनीति की जिसमें प्रचार के दौरान निर्भया काण्ड का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा था-जब वोट डालने जाएं तो निर्भया को याद रखें। मगर आज कठुआ से लेकर उन्नाव तक बीजेपी के बड़े नेता बलात्कार आरोपियों के साथ खड़े नज़र आये। 67.38  रुपये पहुँच चुका है।

द थॉमसन रिट्यूर्स फाउंडेशन के सर्वे की माने तो भारत महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश बन चुका है। ऐसे में नारी पर वार जारी है और ये नारा भी खोखला साबित हो चला है।

बहुत खाई रुपये ने डॉलर से मार- वही बीजेपी ने डॉलर के मुकाबले गिरती रुपये की कीमत पर नारा रखा था। जिसमें कहा गया था ‘बहुत खायी रुपये ने डॉलर से मार’। मगर अर्थव्यवस्था को संभालने में मोदी सरकार लगातार नाकाम रही है, डॉलर की तुलना में ‘रुपया’ ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा चुका है आज सुबह के कारोबार में 69.10 प्रति डॉलर का स्तर तक छू लिया।

बहुत हुआ भ्रष्टाचार अबकी बार मोदी सरकार– इस नारे को गढ़ते वक़्त बीजेपी ने कांग्रेस की उस वक़्त ख़राब छवि का फायदा उठाते हुए भ्रष्टाचार पर हमला बोला। मगर खुद की सरकार आते देश ने कई घोटाले देखें जिसकी न तो जांच और न ही मीडिया में आने दिया।

हाल ही में हुए एक सहकारी बैंक घोटाले पर देखा जा सकता है की कैसे खुद की सरकार होते हुए नोटबंदी के दौरान पैसे जमा करवाए गए,इन सबमें ख़ास बात ये रही की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस बैंक निदेशक है।

वही उनके बेटे जय शाह पर 16000 गुना मुनाफा कमाने का आरोप लगा मगर सरकार ने उसपर भी कोई जांच नहीं बिठाई बल्कि उल्टा उस मीडिया संस्थान पर ही मानहानि का केस कर दिया जिसने रिपोर्ट छपी। भ्रष्टाचार को ख़त्म करने संकल्प लेकर आई मोदी सरकार का ये भी नारा सिर्फ चुनावी जुमला बनकर रह गया।

वही रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट की माने तो मोदी सरकार बैंक घोटाले रोकने में पूरी तरह से नाकाम रही, RBI के अनुसार साल 2017-18 में सरकारी बैंकों में हुए 85% घोटाले हुए है। ऐसे में कैसे मान लिया बहुत हुआ भ्रष्टाचार अबकी बार मोदी सरकार।

Courtesy: Boltaup

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