स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के पैसे में 50 फीसदी बढ़ोतरी पर राहुल गांधी का PM मोदी पर तंज, बोले- “ये ‘काला’ नहीं सब ‘व्हाइट मनी’ है!”

स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के पैसे में 50 फीसदी बढ़ोतरी पर राहुल गांधी का PM मोदी पर तंज, बोले- “ये ‘काला’ नहीं सब ‘व्हाइट मनी’ है!”

कालेधन पर कार्रवाई का दावा करने वाली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए स्विस नेशनल बैंक (SNB) की ओर से जारी रिपोर्ट बड़े झटके की तरह है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्विस बैंकों में भारतीयों का धन 50 प्रतिशत बढ़कर लगभग 7000 करोड़ रुपये हो गया है। भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में सीधे तौर पर रखा गया धन बढ़कर 99.9 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 6,900 करोड़ रुपये) और दूसरों के माध्यम से जमा कराया गया धन भी बढ़कर 1.6 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 110 करोड़ रुपये) हो गया है।

स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को विदेशी जमाराशि के आंकड़े जारी किए, जिसके बाद विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों की याद दिलाते हुए तंज कसा है। राहुल ने ट्वीट किया कि मोदी सरकार जब से आई है सिर्फ कह रही है कि कालाधन लाएंगे, जबकि अब जब 2018 में वहां जमापूंजी बढ़ी है तो वो कह रहे हैं कि ये सब व्हाइट मनी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने एक चैनल के वीडियो को ट्वीट कर कहा, ”2014 में वह (सरकार) कहते थे- स्विस बैंक से ‘काला’ पैसा मैं लाऊंगा और सभी भारतीयों के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा कराऊंगा। 2016 में भाषा बदल गई। उन्होंने (मोदी सरकार) कहा- नोटबंदी ‘काला’धन को देश से खत्म कर देगा। 2018 में उन्होंने (सरकार) कहा- स्विस बैंकों में भारतीयों के ‘व्हाइट’ पैसों में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। स्विस बैंक में ‘कालाधन’ नहीं है!”

सरकार ने दी सफाई

इस मामले में शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने मोदी सरकार का पक्ष सामने रखा है। पीयूष गोयल ने कहा कि स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा जमा किये गये कालेधन के सभी आंकड़े अगले वर्ष तक मिल जायेंगे। गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार के पास सभी जानकारियां हैं और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जायेगा तो उसके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जायेगी। वर्तमान समय में किसी भी व्यक्ति को देश से बाहर रुपये जमा करने का साहस नहीं है और यह सरकार के कठिन परिश्रम से संभव हुआ है।

गोयल ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच एक संधि है जिसके तहत उसने भारत और कुछ अन्य देशों द्वारा दी गयी जानकारियों के आधार पर विदेशी ग्राहकों के बारे में सूचनायें साझा करना शुरू कर दिया है। एक जनवरी 2018 से 31 मार्च 2019 तक सभी डाटा उपलब्ध हो जायेंगे। उन्होंने कल जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुये कहा कि इसको अभी से कालाधन या अवैध लेनदेन की आशंका जताना सही नहीं है।

स्विस बैंक में भारतीयों के पैसे में बढ़ोतरी

गौरतलब है कि चार साल में पहली बार स्विस बैंक में जमा धन बढ़कर पिछले साल एक अरब स्विस फैंक (7,000 करोड़ रुपये) के दायरे में पहुंच गया है। यह आंकड़ा एक साल पहले की तुलना में 50 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। स्विट्जर लैंड के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों में यह बात सामने आई है। इसके अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में रखा गया धन 2017 में 50% से अधिक बढ़कर 7000 करोड़ रुपये (1.01 अरब फ्रेंक) हो गया। इससे पहले तीन साल यहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी।

अपनी बैंकिंग गोपनीयता के लिए पहचान बनाने वाले इस देश में भारतीयों के जमाधन में ऐसे समय दिखी बढ़ोतरी हैरान करने वाली है, जबकि भारत सरकार विदेशों में कालाधन रखने वालों के खिलाफ अभियान चलाए हुए है। स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के सालाना आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67.6 करोड़ फ्रेंक ( लगभग 4500 करोड़ रुपये) रह गया। यह राशि 1987 से इस आंकड़े के प्रकाशन की शुरुआत के बाद से सबसे कम थी।

एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में सीधे तौर पर रखा गया धन 2017 में लगभग 6891 करोड़ रुपये (99.9 करोड़ फ्रेंक) हो गया। वहीं प्रतिनिधियों या धन प्रबंधकों के जरिए रखा गया धन इस दौरान 112 करोड़ रुपये (1.62 करोड़ फ्रेंक) रहा। ताजा आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीयों के धन में ग्राहक जमाओं के रूप में 3200 करोड़ रुपये, अन्य बैंको के जरिए 1050 करोड़ रुपये शामिल है। इन सभी मदों में भारतीयों के धन में आलोच्य साल में बढ़ोतरी हुई।

स्विस बैंक खातों में रखे भारतीयों के धन में 2011 में इसमें 12%, 2013 में 43%, 2017 में इसमें 50.2% की वृद्धि हुई। इससे पहले 2004 में यह धन 56% बढ़ा था। एसएनबी के ये आंकड़े ऐसे समय में जारी किए गए हैं जबकि कुछ महीने पहले ही भारत व स्विटजरलैंड के बीच सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान की एक नयी व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य काले धन की समस्या से निजात पाना है।

Courtesy: JantaKaReporter

Categories: Politics

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