स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के धन में 50 फीसदी बढ़ोतरी पर मायावती का सवाल- ‘क्या पीएम मोदी इस नाकामी का श्रेय लेना पसंद नहीं करेंगे?’

स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के धन में 50 फीसदी बढ़ोतरी पर मायावती का सवाल- ‘क्या पीएम मोदी इस नाकामी का श्रेय लेना पसंद नहीं करेंगे?’

कालेधन पर कड़ी कार्रवाई का दावा करने वाली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए पिछले दिनों स्विस नेशनल बैंक (SNB) की ओर से जारी रिपोर्ट एक बड़े झटके की तरह था। रिपोर्ट के मुताबिक, स्विस बैंकों में भारतीयों का धन 50 प्रतिशत बढ़कर लगभग 7000 करोड़ रुपये हो गया है। इस बीच एक नई रिपोर्ट के मुताबिक स्विस बैंकों में किसी देश के नागरिक और कंपनियों द्वारा धन जमा कराने के मामले में 2017 में भारत 73वें स्थान पर पहुंच गया है।

स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को विदेशी जमाराशि के आंकड़े जारी किए, जिसके बाद विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। मायावती ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि कालेधन पर वार करने के तमाम वादे करने वाले पीएम मोदी क्या इस नाकामी का श्रेय लेना पसंद नहीं करेंगे?

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक मायावती ने एक बयान में आरोप लगाते हुए पूछा कि ‘भाजपा के चहेते भारतीय पूंजीपतियों के स्विस बैंक में जमा धन में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, तो क्या इसका श्रेय भाजपा एण्ड कम्पनी तथा प्रधानमंत्री मोदी लेना पसन्द नहीं करेंगे?’ उन्होंने कहा कि वैसे देशहित का मूल प्रश्न यह है कि भारत में कमाया गया धन विदेशी बैंकों में क्यों जमा है?

उन्होंने कहा कि क्या मोदी सरकार यह अपराध स्वीकार करने को तैयार है कि विदेशी बैकों में जमा देश का कालाधन वापस लाकर उसे देश के प्रत्येक गरीब परिवार के हर सदस्य को 15 से 20 लाख रुपये देने के उसके चुनावी वायदे पूरी तरह से छलावा साबित हुये हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि देश की गरीब और मेहनतकश आम जनता आने वाले सभी चुनावों में मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी इस सवाल का जवाब जरूर चाहेगी कि भाजपा सरकार की नीतियों से अमीर लोग और ज्यादा धनवान तथा गरीब और ज्यादा गरीब क्यों होते जा रहे हैं।

 

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि मीडिया का कहना है कि स्विस नेशनल बैंक के ताजा आंकड़ों से हुए रहस्योद्घाटन ने कालाधन पर अंकुश लगाने के मोदी सरकार के दावों की पोल खोल दी है। अब सवाल यह है कि भारतीय धन्नासेठों के धन में इतनी वृद्धि कैसे हुई है और इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार की नीयत, उनकी नीति तथा बड़े-बड़े दावों का क्या हुआ? क्या इसीलिये भाजपा की केन्द्र तथा राज्य सरकारें निजी क्षेत्र को अंधाधुंध बढ़ावा दे रही हैं, जहां दलितों और पिछड़ों की हमेशा से उपेक्षा होती आयी है।

मायावती ने कहा कि भारतीय रुपये का लगातार अवमूल्यन क्यों हो रहा है तथा भारतीय पासपोर्ट की अहमियत ख़ासकर अमेरिका में लगातार क्यों कम होती जा रही है, सरकार को इस बात का भी जवाब जनता को ज़रुर देना चाहिए।उल्लेखनीय है कि हाल में जारी स्विस नेशनल बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है और यह करीब 7,000 करोड़ रुपये हो गयी।

Courtesy: jantakareporter.

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