ऐसी है रवीश और NDTV के लिये आम आदमी की दीवानगी, ऑटो चालको ने ऑटो पर लिखवाया ‘बेस्ट शो रवीश कुमार प्राईम टाईम ’

ऐसी है रवीश और NDTV के लिये आम आदमी की दीवानगी, ऑटो चालको ने ऑटो पर लिखवाया ‘बेस्ट शो रवीश कुमार प्राईम टाईम ’

आज भी अच्छी पत्रकारिता और पत्रकारों की लोग दीवाने है। हां यह अलग बात है कि चैनलों में हिन्दू-मुस्लिम की डिबेट बढ़ते जा रही है लेकिन आज भी रवीश कुमार और एनडीटीवी जैसे चैनल को लोग पसंद करते हैं। टीआरपी के मामले में एनडीटीवी सबसे नीचे हैं लेकिन न्यूज़ के मामले में सबसे आगे। पिछले कई दिनों से प्राइम टाइम ने युवायों के समस्या पर फोकस कर रहा है।

प्राइम टाइम के वजह से हज़ारों युवायों की जॉइनिंग हुई । कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के 150000 शिक्षा मित्रों को भी दो महीने का तंखा मिली जो अटकी पड़ी हुई थी। इन शिक्षा मित्रों को सिर्फ 10000 तंखा मिलते हैं। यह तंखा बढ़ाने की भी मांग कर रहे हैं। 10000 के हिसाब से सोचेंगे तो यह आप को कम लगेगा लेकिन 10000 को जब आप 150000 के कैलकुलेट करेंगे तो यह 150 करोड़ बन जाता है। दो महीने का तंखा मतलब 300 करोड़। उत्तर प्रदेश सरकार को 300 करोड़ रिलीज करनी पड़ी होगी। इसे आप दिमाग लगा सकते हैं कि तंखा देने में देरी क्यों कि जाति है।। इन शिक्षा मित्रों की समस्या को हम प्राइम टाइम में दिखाए थे।

रोज़ हज़ारों संख्या में युवायों की मेल आते हैं। काफी सारे कॉल आते हैं। लोग तो एनडीटीवी की दफ्तर भी पहुंच जाते हैं। उनको लगता है एनडीटीवी उनकी समस्या का समाधान है। सब परेशान है अपना खबर प्राइम टाइम में दिखाना चाहते हैं लेकिन हम लोग सभी खबर देखा नहीं पाते हैं। हमारे पास संसाधनों की कमी है। फिर भी हम जितना हो सके करते हैं। अगर देश के युवा परेशान है, किसान परेशान तो मीडिया को इनके समस्या पर फोकस करना चाहिए । नेतायों की बाइट के जगह इन लोगों की बाइट चलनी चाहिए। हिन्दू-मुस्लिम के डिबेट के जगह इन लोगों की समस्या पर डिबेट होनी चाहिए।

कुछ दिन पहले बिहार के रहने वाला एक ब्लाइंड छात्र ने एनडीटीवी की आफिस ढूंढते हुए पहुंचा। आप सोच सकते हैं एक ब्लाइंड को कितना दिक्कत हुई होगी। इस छात्र की रेलवे में चयन हुया था लेकिन जिस दिन इसकी अपॉइंटमेंट लेटर ऑनलाइन में अपलोड हुया उसी दिन उसे कोलकाता में जोइनिंग करने के लिए कहा गया था। यह उस के लिए संभव नहीं था फिर उसे यह जॉब नहीं मिली ।

इस छात्र ने कोर्ट में केस किया और हाई कोर्ट ने इस के पक्ष में जजमेंट दिया लेकिन फिर भी रेलवे बोर्ड ने इन्हें जॉब नहीं दिया। फिर यह छात्र एनडीटीवी का आफिस पहुंचा। हम लोगों ने प्राइम टाइम में इसकी समस्या दिखाई , शो खत्म होते ही रेलवे बोर्ड के किसी अधिकारी की हमारे साथी रवीश रंजन शुक्ल जी के पास फ़ोन आया और उस ब्लाइंड स्टूडेंट की नंबर मांगे और हमें लगा कि उसकी जोइनिंग हो जाएगी लेकिन करीब एक महीने से ज्यादा हो गया उस छात्र के पास रेलवे बोर्ड से कोई कॉल नहीं गया है। आप सोच सकते हैं हमारी सिस्टम कैसे काम कर रही है।

प्राइम टाइम ने जॉब सीरीज के साथ साथ यूनिवर्सिटी सीरीज भी चलाई, ट्रैन सीरीज के वजह से लेट चल रहे कई ट्रैन समय पर चलने लगी है। लोकतंत्र में मीडिया का भूमिका अहम है।मीडिया के जरिए ही समाज मे बदलाव हो सकता है लेकिन आजकल मीडिया पत्रकारिता कम और चाटुकारिता ज्यादा करने लगी है। समाज को भी बदलने की जरूरत है। लोगों को घटिया डिबेट से अपने आप को दूर कर देना चाहिए। डिबेट की स्तर रोज गिरते जा रहा है।

कल मैं किसी बड़े चैनल का एक डिबेट देख रहा था जो सोशल मीडिया में अपलोड हुई थी। इस डिबेट में दो राजनेता एक दूसरे के ऊपर खूब चिल्ला रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे टीवी ही फट जाएगा। एंकर कह रही थी चुप रहिए लेकिन यह लोग रूकने वाले नहीं थे । करीब 20 मिनट्स तक ऐसा हुया। मुझे ऐसा लगा की एंकर भी यही चाह रही थी की दोनों झगड़ा करते रहे। एंकर तुरंत ब्रेक ले सकती थी या दोनों की आवाज़ को म्यूट करवा सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुया। सबसे दुख की बात यह है कि चैनल के तरफ से वेब में जो वीडियो अपलोड किया गया है उस के नीचे कैप्शन इन दोनों राजनेताओं के बीच झगड़े को एक्सक्लूसिव लिखा गया।

अब ऑटो वालों की कहानी पर आते हैं। यह ऑटो वाले भी रवीश कुमार जी, एनडीटीवी और प्राइम टाइम प्रोग्राम की दीवाने है। पिछले कुछ दिनों से एक ऐसे ऑटो सोशल मीडिया में वायरल होने लगा था । हम सब यही सोच रहे थे शायद एक ऑटो वाला रवीश कुमार, एनडीटीवी और प्राइम टाइम का दीवाना है लेकिन कुछ दिन पहले हम सब ने देखा कि पांच ऐसे ऑटो एनडीटीवी के पार्किंग में खड़े हैं और यह लोग रवीश जी मिलने के लिए एनडीटीवी आए थे।

अपने साथ गिफ्ट भी लाये थे। बातचीत से पता चला कि यह लोग ऐसे ही अंध भक्त नहीं है। कई दिनों तक यह लोग अलग अलग चैनल देख रहे थे। एक चैनल की प्रोग्राम को दूसरे चैनल से तुलना करने के बाद यह लोग इस निर्णय पर पहुंचे की प्राइम टाइम और एनडीटीवी असली खबर दिखाती है। समाज को जोड़ने की कोशिश करती है तोड़ने की नहीं। फिर यह लोग एक पेंटर के पास जाकर ऑटो के पीछे ऐसे पेंटिंग कर दिए ।

 

Courtesy: nationalspeak.

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