ममता ने दिया फार्मूला, कि 2019 में कैसे रोकना है मोदी का विजय रथ? विपक्ष भी दे ये सलाह

ममता ने दिया फार्मूला, कि 2019 में कैसे रोकना है मोदी का विजय रथ? विपक्ष भी दे ये सलाह

नई दिल्ली – 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अब जो भी वक़्त बचा है वह वक्त तैयारी का ही है। सभी पार्टियां अब इस कोशिश में हैं कि सारे गुट को एकजुट किया जाए और फिर सीधा मुक़ाबला किया जाए। विपक्ष इस वक्त गठबंधन बनाने में व्यस्त है। ऐसे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रिमो ममता बनर्जी ने विपक्षी पार्टियों के लिए एक ऐसा फार्मूला सुझाया है जो उन्हें जीत के रास्ते पर ले जाएगा।

ममता ने बताया ये रास्ता

एक समाचार चैनल से बात करते हुए टीएमसी सुप्रिमो ममता बनर्जी ने कहा कि अगर भाजपा के खिलाफ ऐसा भी हो जाए कि 75 सीटों पर महागठबंधन का उमीदवार खड़ा हो जाए तो भी भाजपा का खेल ख़त्म हो जायेगा। उन्होंने कहा कि अब बसपा और सपा एक साथ आ गए हैं तो भाजपा का खेल ख़त्म ही हो जाएगा। ममता ने कहा कि अभी इसके बारे में एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है।

मजबूत गठबंधन के लिए क्या करे?

हालांकि ममता ने कहा कि इस पर जो भी फैसला होगा सामूहिक होगा क्योंकि विपक्ष एक बड़ा परिवार है। उन्होंने जीत का फार्मूला भी बताया कि जहां कांग्रेस की स्थिति अच्छी है वहां उसी को चुनाव लड़ने दिया जाए जहां क्षेत्रीय दलों की स्थिती मज़बूत है वहां क्षेत्रीय दलों को लड़ने का मौक़ा दिया जाए। ममता ने कहा कि मुश्किल मुद्दों को अभी छोड़ दिया जाए जाना चाहिए और पीएम कौन होगा, न्यूनतम साझा कार्यक्रम क्या होगा ये तय हो जाना चाहिए। बता दें कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के ख़िलाफ़ विपक्ष एक मज़बूत गठबंधन बनाने की कोशिश में है।

क्या है मौजूदा स्थिति

फिलहाल विपक्ष को उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और झारखण्ड में एक मजबूत गठबंधन बनाने में सफलता दिख रही है। जहां यूपी में अस्सी लोकसभा, कर्नाटक में 28 और झारखण्ड में 14 लोकसभा सीट हैं लेकिन बिहार में राजग के मजबूत गठबंधन के आगे विपक्ष अभी भी कमज़ोर दिख रहा है। बिहार में भाजपा के साथ जनता दल यूनाइटेड, राम विलास पासवान की लोजपा और उपेन्द्र कुश्वाहा की रालोसपा है वहीं महागठबंधन में कांग्रेस और राजद है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ भी महागठबंधन में आ गयी है लेकिन जब तक पासवान और कुशवाह विपक्षी दलों के साथ नही आते है तब तक भाजपा की स्थिति बहुत मजबूत ही रहेगी। कर्नाटक में अगर कांग्रेस और जनता दल सेकुलर का तालमेल बना रहता है फिर भाजपा को इस राज्य में भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बसपा पर टिकी हैं निगाहें

राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि कांग्रेस मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बसपा के साथ गठबंधन कर सकती है। जहां तक कांग्रेस की बात की जाए तो उसके लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव जीतना ज़रूरी है क्योंकि इन राज्यों में चुनाव इसी साल होने वाले है। महाराष्ट्र में अभी तक ना तो विपक्ष और ना ही भाजपा गठबंधन की रुपरेखा बना पाई है। इस तरह से मोदी सरकार के लिए मुश्किल चुनौती आने वाली है लेकिन विपक्ष कैसे इस लाभ का फायदा उठा पाता है ये देखने वाली बात है।

Courtesy: nationalspeak

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