अलवर लिंचिंग पर बोले लोग- गायों का तस्कर नहीं, किसान था वो… कसूर सिर्फ इतना कि मुसलमान था वो

अलवर लिंचिंग पर बोले लोग- गायों का तस्कर नहीं, किसान था वो… कसूर सिर्फ इतना कि मुसलमान था वो

इन दिनों बीजेपी शासित राज्यों में मुसलमानों को गोरक्षा के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड और राजस्थान तक गायों को बचाने के नाम पर बेकसूर मुसलमानों का ख़ून बहाया जा रहा है।

ख़ुद को गोरक्षक कहने वाली भीड़ कभी उत्तर प्रदेश के हापुड़ में गाय चोर कहकर पेशे से किसान मोहम्मद कासिम की जान ले लेती है तो कभी झारखंड में व्यापारी अलीमुद्दीन को गोमांस रखने के शक में मौत के घाट उतार देती है।

अब बात राजस्थान की करें तो यहां मुसलमानों के खिलाफ़ नफ़रत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल के अंदर यहां कभी लव जिहाद के नाम पर मज़दूर अफ़राज़ुल को जिंदा जलाकर मार दिया जाता है तो कभी बेकसूर किसान पहलू खान को गो तस्करी के शक में पीट-पीट कर मार दिया जाता है।

वसुंधरा राजे के शासन वाले राजस्थान में मुसलमानों के ख़िलाफ़ दरिंदगी का सिलसिला यहीं नहीं ख़त्म होता। पहलू खान और अफ़राज़ुल की हत्याओं की टीस अभी सीनों में चुभ ही रही थी कि अलवर में एक बार फिर एक मुसलमान को गोरक्षा के नाम पर निशाना बनाया जाता है। गोरक्षा की दुहाई देने वाले गुंडे 28 वर्षीय रकबर खान को बड़ी बेरहमी से पीट-पीट कर मौत के घाट उतार देते हैं।

इन तमाम मामलों में आरोप भीड़ द्वारा लगाया जाता है और भीड़ ख़ुद ही वकील बनकर आरोपों को स्थापित करती है। जिसके बाद मौके पर ही भीड़ जज बन जाती है और पीड़ित को आरोपी से दोषी ठहराते हुए उसे सज़ाए मौत सुना देती है। भीड़ जज बनकर सिर्फ सज़ा ही नहीं सुनाती बल्कि ख़ुद ही जल्लाद बनकर सज़ा भी देती है।

भीड़ द्वारा ऑन स्पॉट दी गई इन सज़ाओं का मामला जब कोर्ट में आता है तो पता चलता है कि मारा गया मुसलमान बेकसूर था। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर भी टिप्पणी की जा रही है। रवीश कुमार के पैरोडी अकाउंट से ट्विटर पर लिखा गया, “गायों का तस्कर नहीं, किसान था वो…  कसूर सिर्फ इतना कि मुसलमान था वो”।

 

Courtesy: Boltaup

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