‘गंगा पुत्र’ के राज में गंगा हुई और ज़हरीली, NGT का निर्देश- सिगरेट की तरह दी जाए सावधानी की चेतावनी

‘गंगा पुत्र’ के राज में गंगा हुई और ज़हरीली, NGT का निर्देश- सिगरेट की तरह दी जाए सावधानी की चेतावनी

गंगा को साफ़ करने के लिए बड़े बड़े दावे किये गए मगर सभी दावे फेल रहे। यही वजह रही जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सरकारों को सुजाव दिया है कि वो हर सौ किलोमीटर के अंदर ये डिस्प्ले लगाये कि पानी पीने या नहाने लायक है या नहीं। यही नहीं एनजीटी ने गंगा की तुलना सिगरेट से करते हुए कहा कि जैसे सिगरेट की पैकेट पर चेतवानी दी जाती है वैसे ही गंगा में नहाने पर भी चेतवानी का बोर्ड लगा दिया जाये।

दरअसल एनजीटी ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को निर्देश देते हुए कहा कि 2 सप्ताह के अंदर अपनी वेबसाइट पर एक मानचित्र लगाने का निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जा सके कि किन स्थानों पर गंगा का जल नहाने और पीने लायक है।

एनजीटी गंगा की सफाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उत्तराखंड के हरिद्वार से लेकर यूपी के उन्नाव तक गंगा नदी का जल इस्तेमाल करने के योग्य बिल्कुल नहीं है। कानपुर के सरसिया घाट पर लोगों ने एनजीटी के इस निर्देश पर कहा, ‘यह सही है कि गंगा का जल पीने या फिर किसी अन्य उपयोग के लायक नहीं है। लेकिन लोगों की श्रद्धा यहां से जुड़ी हुई है।

बता दें, कि 1000 मिलीलीटर पानी में 2,500 से ज्यादा कोलिफॉर्म माइक्रोऑर्गेनिज्म्स की मौजूदगी इसे नहाने के लिए असुरक्षित बना देती है। सरकार ने माना है कि साल 2017 में ब्रिज के पास से लिए गए पानी के नमूने में विष्ठा कोलिफॉर्म बैक्टीरिया प्रति 100 मिलीलीटर में 49,000 पाए गए, जबकि 2014 में यहीं आकंड़ा प्रति 100 मिलीलीटर 31,000 का था।

Categories: India