किराया बढ़ा कर भी सुरक्षा नहीं: ट्रेनों में बेतहाशा बढ़ीं चोरी, रेप की घटनाएं

किराया बढ़ा कर भी सुरक्षा नहीं: ट्रेनों में बेतहाशा बढ़ीं चोरी, रेप की घटनाएं

इंडियन रेलवे तमाम कोशिशों के बावजूद ट्रेनों में होने वाली अपराध की घटनाओं को रोक नहीं पा रहा है। अब RPF ने रेल मंत्रालय से अधिकारों में ईजाफा करने की मांग की है, ताकि एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा सके। ट्रेनों में अपराध के सबसे ज्‍यादा मामले महाराष्‍ट्र, उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश में सामने आए हैं।

इंडियन रेलवे ने पिछले कुछ दिनों में विभि‍न्‍न तरीके से क‍िराये में वृद्धि की है। रेलवे इसके पीछे अन्‍य सुविधाओं के साथ सुरक्षा व्‍यवस्‍था को भी दुरुस्‍त करने की दलील देता रहा है। ट्रेनों में चोरी और रेप की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) रेल मंत्रालय से और ज्‍यादा अधिकार मांगे हैं। आरपीएफ ने एफआईआर दर्ज करने और मामलों की जांच करने का अधिकार देने की मांग की है, ताकि ट्रेनों में होने वाली आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके। ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ द्वारा हासिल डेटा से चलती ट्रेनों में होने वाले अपराध के बारे में जानकारी मिली है। इसके अनुसार, वर्ष 2017 में देश भर में चलती ट्रेनों में होने वाली चोरी की घटनाएं दोगुनी हो गईं। इसके अलावा डकैती के मामलों में तकरीबन 70 फीसद तक का उछाल आया है। रेप की घटनाओं में भी ईजाफा हुआ है। वर्ष 2017 में ट्रेनों में अपराध की 71,055 मामले सामने आए थे। वर्ष 2016 में यह आंकड़ा 39,355 तक था। इस साल मार्च तक ऐसे 20,777 वारदात हो चुके हैं।

महाराष्‍ट्र, यूपी और एमपी में सबसे ज्‍यादा अपराध: ट्रेनों में होने वाली आपराधिक घटनाओं के मामले में देश के तीन बड़े राज्‍य शीर्ष पर हैं। दिलचस्‍प है कि शीर्ष तीन राज्‍यों में बिहार और नक्‍सल प्रभावित झारखंड का नाम नहीं है। डेटा के अनुसार, महाराष्‍ट्र, उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश में ट्रेनों में सबसे ज्‍यादा आपराधिक घटनाएं हुईं। महाराष्‍ट्र में वर्ष 2016 में अपराध की ऐसी 7,338 घटनाएं हुई थीं जो वर्ष 2017 में बढ़कर चार गुना से भी ज्‍यादा 33,145 तक पहुंच गया। वर्ष 2018 (मार्च तक) में भी ट्रेनों में 11,614 आपराधिक वारदात हो चुकी हैं। उत्‍तर प्रदेश में वर्ष 2016 में ट्रेनों में अपराध की 7,692 घटनाएं हुई थीं। साल 2017 में यह आंकड़ा बढ़ कर 8,383 तक पहुंच गया। इस मामले में मध्‍य प्रदेश तीसरे स्‍थान पर है। मध्‍य भारत के इस राज्‍य में वर्ष 2016 में ट्रेनों में अपराध की 5,358 घटनाएं हुई थीं। अगले साल ट्रेनों में ऐसी 7,341 वारदात हुईं। इस मामले में तमिलनाडु चौथे और बिहार पांचवें स्‍थान पर है।

रेप की घटनाएं भी बढ़ीं: ट्रेनों में चोरी, डकैती और मारपीट के अलावा रेप समेत महिलाओं के खिलाफ अपराध की अन्‍य घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016 में मह‍िलाओं के खिलाफ अपराध की 604 घटनाएं सामने आई थीं जो वर्ष 2017 में बढ़कर 641 हो गईं। इस साल मार्च तक ऐसी 193 घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

RPF के पास सीमित अधिकार: ट्रेनों में सुरक्षा की जिम्‍मेदारी आरपीएफ के साथ जीआरपी (संबंधित राज्‍य सरकार के अंतर्गत) के पास है। आरपीएफ सिर्फ रेलवे की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामले की ही जांच करता है। अन्‍य आपराधिक मामलों की जांच की जिम्‍मेदारी जीआरपी के पास होती है। जीआरपी ही ऐसी घटनाओं में एफआईआर भी दर्ज करता है।

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