राज्यसभा में NRC में अवैध बताए गए लोगों को अमित शाह ने कहा घुसपैठिया, भड़क गईं एंकर साक्षी, पूछा ‘जब पहले ही घुसपैठिया मान लिया है तो….’

राज्यसभा में NRC में अवैध बताए गए लोगों को अमित शाह ने कहा घुसपैठिया, भड़क गईं एंकर साक्षी, पूछा ‘जब पहले ही घुसपैठिया मान लिया है तो….’

नई दिल्ली  असम का एनआरसी विवाद असम से लेकर दिल्ली तक छाया हुआ है, मंगलवार को राज्यसभा में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए थे जिसकी मूल आत्मा ही NRC थी। उनकी हिम्मत नहीं थी अमल में लाने की, हममें हिम्मत है लागू करने की। उन्होंने अवैध ठहराए गये चालीस लाख लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिया करार दिया है।

अमित शाह द्वारा अवैध ठहराए गए लोगों को घुसपैठिया कहने पर न्यूज़ एंकर साक्षी जोशी ने आपत्ती जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि अभी तो 30 अगस्त से 28 सितंबर का वक़्त आप ही की सरकार ने दिया है। जिन्हें अमित शाह राज्य सभा में घुसपैठिया बोल गए हो सकता है उनमें से कितने भारतीय नागरिक साबित हो जाएँ। पहले ही आपने सभी 40 लाख को घुसपैठिया मान लिया तो फिर दोबारा अपील करने का समय देना नाटक था?

साक्षी ने एनआरसी के बहाने महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि दक्षिण अफ़्रीका में भी भारतीयों से उनके फ़िंगरप्रिंट और दस्तावेज़ माँगे गए थे जो गांधी जी ने मना कर दिया था। ये उन गांधी जी का देश है जो दक्षिण अफ़्रीका में asiatic registration law (जिसे black act भी कहा जाता था) के ख़िलाफ़, भारतीयों के अधिकार और सम्मान के लिए लड़ रहे थे। सिर्फ याद दिलाना चाह रही थी हमारे देश की मूल आत्मा क्या है।

छात्राओं का सवाल

उन्होने यूपी के इलाहबाद में अमित शाह के काफिले को काला झंडा दिखाने वाली छात्राओं को लेकर भी सवाल किया है। और कहा है कि अमित शाह जी की सुरक्षा में सेंध हुई। लेकिन अगर उसके लिए किसी पर कार्रवाई होनी चाहिए तो वो है पुलिस न कि वो छात्राएँ जो काला झंडा फहरा रही थीं।उसके बाद उन्हें पीटा गया और गंभीर धाराएँ लगा दी गईं।पर क्या किसी BJP नेता ने छात्राओं से जाकर पूछा कि उनकी नाराज़गी किस बात पर थी?

उन्होंने आगे कहा कि पता करने पर मुझे ये मालूम हुआ है कि ये छात्राएँ भी कोई मासूम नहीं थीं, या इन्हें बीजेपी से कोई समस्या थी! ये तो दरअसल युनिवर्सिटी के चुनावों में टिकट माँग रही थीं, जब नहीं मिली तो पब्लिसिटी स्टंट के लिए ये सब किया।उसके बावजूद मेरा मानना है कि बड़ों को ही बड़प्पन दिखाना चाहिए।

Courtesy: nationalspeak.

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