GST में सरकार बार-बार कर रही फेरबदल, सरकारी राजस्व को होगा हज़ारों करोड़ का नुकसान

GST में सरकार बार-बार कर रही फेरबदल, सरकारी राजस्व को होगा हज़ारों करोड़ का नुकसान

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिना किसी तैयारी के लागू करने का परिणाम अब सरकार को भोगना पड़ रहा है। जीएसटी काउन्सिल की हलियाँ बैठक में हुए कर कटौती के फैसले के बाद सरकारी राजस्व को हज़ारों करोड़ का घाटा हो सकता है।

मोदी सरकार ने जल्दबाजी में इस कर व्यवस्था को लागू किया। उस समय इसे बिना ठोस विश्लेषण के लागू किया गया। लेकिन उसके बाद से ही सरकार लगातार अपने ही फैसलों में बदलाव कर रही है। करों को घटाया बढ़ाया जा रहा है। इस वजह से राजस्व को लेकर स्थिरता नहीं बन पा रही है।

बता दें, कि जीएसटी में बार-बार कर की दरों में बदलाव से पूरे वित्त वर्ष में जीएसटी से 7.4 लाख करोड़ रुपये (100 अरब डॉलर) की वसूली के लक्ष्य के चूकने का जोखिम पैदा हुआ है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी सोमवार को कहा कि हाल में 88 उत्पादों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में कटौती सरकारी राजस्व पर भारी पड़ेगी और यह साख नकारात्मक करने वाला है, क्योंकि इससे राजकोषीय मजबूती के प्रयासों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह घरेलू उपभोक्ता उपकरणों के साथ ही विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों व पेंट पर जीएसटी दर में कटौती की थी। एजेंसी ने कहा कि हमें जीएसटी दर में हालिया कटौती से राजस्व में सालाना सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 0.04 फीसदी से 0.08 फीसदी तक नुकसान होने की उम्मीद है।

मूडीज ने कहा कि जनवरी 2018 तथा नवंबर 2017 के बाद हाल में कर में कटौती सरकार के राजस्व संग्रह पर भारी पड़ेगी और यह साख के लिए नकारात्मक है, क्योंकि इससे सरकार का राजकोषीय मजबूती का प्रयास दबावग्रस्त होगा।

Courtesy: Boltaup

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