राजनीतिक दलों द्वारा बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग के बीच EVM को आधार से जोड़ने की तैयारी, चुनाव आयोग कर रहा विचार

राजनीतिक दलों द्वारा बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग के बीच EVM को आधार से जोड़ने की तैयारी, चुनाव आयोग कर रहा विचार

देश में पिछले काफी समय से विपक्षी पार्टियों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की पारिदर्शिता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। देश की कई राजनीतिक पार्टियां लगातार बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग कर रही हैं। ईवीएम मसले पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साध रहा विपक्ष अब चाहता है कि अगले साल होने वाले 2019 का आम चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं ना कि ईवीएम से। विपक्षी दल बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी तेज कर दी है।

राजनीतिक दलों द्वारा बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग के बीच ईवीएम में तकनीकी सुधार करके उसमें ‘आधार’ प्रमाणीकरण की सुविधा भी डाली जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे मतदाता की पहचान का झंझट खत्म हो जाएगा और ‘आधार’ प्रमाणीकरण से ही वह वोट डाल सकेगा। समाचार पत्र ‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ईवीएम को आधार से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि ‘आधार’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है। हम उसका इंतजार कर रहे हैं। यदि हरी झंडी मिलती है तो हम उसके बाद मतदाता सूची को ‘आधार’ से जोड़ने के कार्य को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही ईवीएम में तकनीकी सुधार करके उसमें ‘आधार’ को भी समायोजित कर सकते हैं। आजतक रोज तकनीक में नई-नई चीजें हो रही हैं।

अखबार के मुताबिक रावत ने कहा कि इससे फायदा यह है कि मतदाता को अपनी पहचान साबित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब मतदान होता है तो इस प्रक्रिया में काफी लोग लगे रहते हैं। नई तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया आसान होगी। दूसरे, मतदान प्रक्रिया में समय भी कम लगेगा।

चुनाव आयोग ने पूर्व में मतदाता सूचियों को ‘आधार’ से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। करीब 30 करोड़ मतदाताओं ने ‘आधार’ को मतदाता सूची से लिंक भी करा लिया था। लेकिन इसके बाद एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। तब से यह कार्य लंबित है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बाकायदा अर्जी दी है कि ‘आधार’ को मतदाता सूची से लिंक करने की अनुमति प्रदान की जाए।

17 राजनीतिक दल चाहते हैं 2019 में बैलेट पेपर से हो मतदान

बता दें कि 17 विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही चुनाव आयोग से मुलाकात कर बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग सकता है। बैलेट पेपर से चुनाव कराने की इस मांग में एनडीए के घटक दल शिवसेना भी विपक्षी दलों के साथ आयोग का दरवाजा खटखटा सकती है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हार के बाद अलग अलग मौकों पर ईवीएम की हैकिंग और री प्रोग्रामिंग किए जाने के आरोप लगाए हैं।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग के साथ चुनाव आयोग से मुलाकात करने के मुद्दे पर विपक्षी दलों की अगले सप्ताह बैठक होने की उम्मीद है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दल बैलेट से चुनाव की मांग कर चुके हैं, पर बुधवार को तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने की पहल की है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल साथ हैं।

बता दें कि इससे पहले समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी। अखिलेश ने कहा था कि वो इस मांग को लेकर ‘बैलेट सत्याग्रह’ की तैयारी में हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी ईवीएम का विरोध कर चुके हैं।

इन दलों ने किया विरोध

कहा जा रहा है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करने वाली पार्टियों में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस, द्रमुक, जेडीएस, टीडीपी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और सीपीआई-एम, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और शिवसेना शामिल है।

वीवीपैट से चुनाव

वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट (वीवीपीएट) व्यवस्था के तहत वोटर डालने के तुरंत बाद स्क्रीन पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न दिखाई देता है। हालांकि अभी सभी ईवीएम मशीनों को वीवीपैट से जोड़ा नहीं जा सका है।

चुनाव आयोग और सरकार दे चुके हैं सफाई

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने 2 जून 2018 को कहा था कि ईवीएम को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, क्योंकि मशीनें बोल नहीं सकतीं। राजनीतिक दलों को अपनी हार के लिए किसी न किसी को जिम्मदार ठहराने की जरूरत होती है। बैलेट पेपर वापस लाने की कोई संभावना नहीं है। वहीं 30 जुलाई को केंद्र सरकार (कानून राज्यमंत्री पीपी चौधरी, राज्यसभा में) ने संसद में कहा 2019 का लोकसभा चुनाव ईवीएम और वीवीपैट से ही होंगे।

Courtesy: jantakareporter.

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