बी पी मंडल की जयंती को ‘सामाजिक न्याय दिवस’ घोषित करे सरकार नहीं तो सत्ता से उखाड़ फेंकेगा OBC

बी पी मंडल की जयंती को ‘सामाजिक न्याय दिवस’ घोषित करे सरकार नहीं तो सत्ता से उखाड़ फेंकेगा OBC

देश की सबसे बड़ी आबादी यानी OBC के वास्तविक हालात को पहचानने और अधिकार दिलाने वाले BP मंडल की जयंती 25 अगस्त को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है। इस मौके पर जगह-जगह आयोजन किए जा रहे हैं।

पिछड़ों के अधिकारों के लिए मुखर रही तमाम आवाजों को एकजुट करने वाले इन आयोजनों की दस्तक ने मोदी सरकार को सकते में डाल दिया है कि देश की इतनी बड़ी आबादी अपने अधिकारों को लेकर सजग हो जाएगी तो सत्ता में दोबारा वापसी नामुमकिन हो जाएगी।

बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके बी पी मंडल की अध्यक्षता में बनाई गई रिपोर्ट को ही ‘मंडल कमीशन’ के नाम से जाना जाता है, जिसके अंश मात्र के लागूकरण की वजह से देश में ओबीसी आरक्षण संभव हो सका है। हालांकि उनकी रिपोर्ट बृहद है जो सिर्फ OBC आरक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि पिछड़ों के सामाजिक और आर्थिक हालात से अवगत कराती हुई एक बड़े सुधार का रोडमैप सुझाती है।

इसी कड़ी में रविवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित प्रोग्राम में बी पी मंडल के योगदान और पिछड़े समाज के हालात पर जमकर चर्चा हुई।

 

पीआईएल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस प्रोग्राम की सबसे बड़ी खूबी थी कि चर्चा का दायरा बड़ा रखा गया। राजनेताओं के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, जजों , शिक्षाविदों और मीडियाकर्मियों के संबोधन के जारिए पिछड़े समाज के सभी पहलुओं पर चर्चा करने की कोशिश की गई।

 

जहां राजनेताओं में पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी और वर्तमान लोकसभा सांसद पप्पू यादव और उदित राज मौजूद थे वहीँ सामाजिक कार्यकर्ताओं में चंद्रपाल सिंह, सिकंदर यादव, पूर्व आईएएस गोरेलाल यादव शामिल हुए। न्यायपालिका में पिछड़ों के हालत पर चर्चा के लिए पूर्व न्यायधीश एस आर सिंह और अधिवक्तागण की मौजूदगी रही।

सामाजिक न्याय की बात रखने के लिए वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली और नवीन कुमार मौजूद रहे। इसके साथ ही वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पिछड़ों के हितों पर चर्चा करने के लिए प्रोफेसर रतनलाल मौजूद रहे।

बसपा के पूर्व सांसद बलिहारी बाबू की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज एस आर सिंह रहे।

पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी ने जातिगत जनगणना पर जोर देते हुए कहा कि जब तक सही संख्या का पता नहीं चलेगा तब तक लोगों की हिस्सेदारी को कैसे सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके साथ ही वर्तमान सरकार पर आक्रामक होते हुए अली अनवर अंसारी ने बहुजनों के एकता की बात की।

उन्होंने कहा- ‘इस  देश का मुसलमान खुद को अल्पसंख्यक क्यों मानता है? वह इस देश में बहुजनों के साथ मिलकर बहुसंख्यक आबादी बनाता है, वह इस देश का मूल निवासी है। इसलिए अब मुसलमानों को कहना शुरू कर देना चाहिए कि वह बहुजन हैं, इस देश के मूल निवासी हैं और इस देश की सबसे बड़ी आबादी होने के नाते बहुजनों का अधिकार सबसे ज्यादा है।’

कार्यक्रम में सत्ताधारी दल से लोकसभा सांसद उदित राज भी शामिल हुए थे। हालाँकि मुलायम सिंह को आरक्षण विरोधी बताते हुए वह श्रोताओं से उलझ गए और विवाद की स्थिति में बिना कोई ठोस बात रखे हुए चले गए।

उनकी तमाम बातों का सार यही था कि दलित-पिछड़ों की राजनीति करने वाले नेताओं ने दलित-पिछड़ों के लिए कुछ नहीं किया। वैसे भाजपा जैसी पार्टियों ने बहुजनों के लिए क्या किया है, इसका भी उनके पास जवाब नहीं था।

दलित-पिछड़ों के नेताओं के प्रयास को नाकाफी मानते हुए सांसद पप्पू यादव ने कहा कि ‘पिछड़ों को चौतरफा ठगा जा रहा है इसलिए अब बात करने का नहीं काम करने का वक्त आ गया है। पिछड़ों के हित की बात करने वाले नेताओं को अब प्रैक्टिकल हो जाना चाहिए सिर्फ सैद्धांतिक बातें करने से कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।’

हालांकि दलित-पिछड़े नेताओं की आपसी एकजुटता के प्रति एक उम्मीद जगाते हुए प्रोफेसर रतनलाल ने कहा ‘अब अगर अखिलेश यादव को शूद्रता का अहसास हो गया है और मायावती के साथ मिलकर दलित-पिछड़ों का एक बड़ा फ्रंट खड़ा करना चाहते हैं तो इसमें किसी को नाराजगी क्यों है। बहुजनों की एकता लोगों से देखी नहीं जा रही है क्या।’

पिछड़े समाज के वर्तमान हालात पर मीडिया की तरफ से भी कुछ आवाजें बुलंद हुई। वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली के संबोधन के बाद पत्रकार नवीन कुमार ने तमाम मुद्दे उठाए।

उन्होंने कहा- ‘पिछड़े समाज के छात्रों को विश्वविद्यालय में पढ़ने से रोका जा रहा है। प्राइवेट संस्थानों को बढ़ावा देकर जातिवादी लोगों को आगे किया जा रहा है। इसके साथ ही भागीदारी का सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में पिछड़ों को भागीदारी ना देकर ये सरकारें सिर्फ और सिर्फ ठग रही हैं।  इसलिए अब बहुजनों की जिम्मेदारी है कि अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।’

कार्यक्रम के आयोजक PIL फाउंडेशन की तरफ से गौरव और संतोष यादव से बात करने पर कार्यक्रम के विजन का पता चला।

उन्होंने बताया – ‘कार्यक्रम का उद्देश्य यही था कि पिछड़े समाज की आवाज बुलंद करने वाले तमाम राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और शिक्षाविद देश की राजधानी में एकजुट हो सकें। बी पी मंडल की 100वीं जयंती पर केंद्र सरकार से मांग की जाती है कि इसे ‘सामाजिक न्याय दिवस’ घोषित किया जाए। ताकि आने वाली पीढ़ियों को पता चल सके की बी पी मंडल का योगदान क्या है और पिछड़े समाज के हक की बात करने वाली बी पी मंडल इस देश के लिए ‘भारत रत्न’ क्यों हैं।

Courtesy: Boltaup

Categories: India
Tags: OBC

Related Articles