कांग्रेस का वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना, सरकार ने अर्थव्यवस्था को बेहद तंगहाली में धकेल दिया -केवल ब्लॉग लिखने से नहीं बढ़ेगा निवेश

कांग्रेस का वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना, सरकार ने अर्थव्यवस्था को बेहद तंगहाली में धकेल दिया -केवल ब्लॉग लिखने से नहीं बढ़ेगा निवेश

कांग्रेस ने रविवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अपनी अनौपचारिक और अदूरदर्शी आर्थिक नीतियों से उन्नतिशील अर्थव्यवस्था को बिगाड़कर घोर तंगहाली में धकेल दिया है, और किसी भी किस्म की लीपापोती या ब्लॉग लिखने से सच्चाई नहीं छिप सकती।

कांग्रेस ने कहा है कि यूपीए शासन में देश ने ऐतिहासिक तौर पर जबरदस्त आर्थिक विकास किया और उस दौरान दशकीय विकास दर 8.13 फीसदी रही, जबकि मोदी सरकार के दौर में 2017-18 की विकास दर 6.7 फीसदी रही है, जो कि बीते चार साल का सबसे निचला स्तर है।कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सिलसिलेवार ढंग से ट्वीट के जरिए कहा, “प्रिय अरुण जेटली, कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल यानी 2004 से 2014 के दौरान देश में आजादी के बाद सबसे अधिक दशकीय आर्थिक विकास दर हासिल की गई। वहीं मोदी सरकार के दौर में पिछले साल की विकास दर चार साल के निचले स्तर पर पहुंचकर 6.7 फीसदी रही। इस दौरान जुलाई 2018 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने खुद ही भारत की विकास दर अनुमान घटाया है।”

उन्होंने कहा, “जेटलीजी को मालूम हो कि मोदी सरकार को एक ऐसी अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी जो प्रगति की ओर अग्रसर थी। लेकिन बीजेपी की अनौपचारिक और अदूरदर्शी नीतियों-नोटबंदी, बिना तैयारी के और त्रुटिपूर्ण ढंग से लागू जीएसटी और कर आतंकवाद के कारण तेजी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया।” उन्होंने इस ट्वीट में कहा कि नौकरियां हैं नहीं, निवेश हो नहीं रहा और सुधार सुस्त पड़े हैं।

सुरजेवाला ने वित्तमंत्री अरुण जेटली के सोशल मीडिया के उस पोस्ट की प्रतिक्रया में ट्वीट किया है जिसमें जेटली ने कहा कि 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद ही परिवर्तनकारी बदलाव आया है। जेटली ने अपने पोस्ट में कहा था कि 2014 और 2018 में जारी आंकड़ों से साबित हुआ है कि ऊंची महंगाई दर, राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा के साथ-साथ बुनियादी ढांचागत व बिजली क्षेत्र में गतिरोध पूर्व की यूपीए सरकार की नाकामी के कारण थे। जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा था कि, “हमने काफी प्रगति की है। पिछले चार साल में सरकार ने विधायी व अन्य मामलों में सिलसिलेवार ढंग से सुधार किए हैं। सिस्टम में काफी स्वच्छता और पादर्शिता आई है।”सुरजेवाला ने जवाब दिया कि कुछ प्राचलों (पैरामीटर) से जाहिर होता है कि अर्थव्यस्था में मंदी का रुख रहा है और किसी प्रकार से लीपापोती करने से उन तथ्यों को बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आंकड़ा देते हुए कहा, “सकल अचल पूंजी निर्माण 2011-12 में जीडीपी का 34.3 फीसदी था। वर्ष 2013-14 में भी यह 31.3 फीसदी था। पिछले तीन साल में यह 28.5 फीसदी रहा और इससे विकास दर प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि निवेश की हालत खराब है। किसी भी किस्म की लीपापोतीकरने या ब्लॉग लिखने से उसे बदला नहीं जा सकता।”उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जिस ढंग से जीडीपी की पिछली श्रंखलाओं को छिपाने और तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की, वह घूमकर अब सामने आ गया है। ये तथ्यों को छिपाकर आखिर किसे बेवकूफ बनाना चाहते हैं।

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