शर्मनाकः जमानत पर जेल से बाहर आए अजमेर ब्लास्ट के आतंकियों के समर्थन में BJP और वीएचपी ने निकाली विशाल रैली

शर्मनाकः जमानत पर जेल से बाहर आए अजमेर ब्लास्ट के आतंकियों के समर्थन में BJP और वीएचपी ने निकाली विशाल रैली

कृष्णकांत

इस बार आतंकवादियों का माल्यार्पण. अजमेर ब्लास्ट केस के दो सजायाफ्ता कैदियों को भाजपा और विश्वहिंदू परिषद ने महिमामंडित किया. ये लिंचिंग के आरोपी नहीं हैं. ये बम धमाके में आरोपी थे जिन्हें अदालत से उम्र कैद की सजा मिली थी. हो सकता है कि उच्च अदालतों से ये बरी हो जाएं, लेकिन जब वे निचली कोर्ट से सजा पा चुके हैं, बेल पर बाहर आते ही उनका ऐसा स्वागत किया गया जैसे कि भगवान राम वनवास से लौटे हैं.

2007 में अजमेर दरगाह में बम धमाका हुआ था. तीन लोग मारे गए थे और 15 घायल हुए थे. इसमें आरोपी भावेश पटेल और देवेंद्र गुप्ता को जयपुर अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उन्हें बेल मिली. ​इसके बाद जब वे गुजरात के भरूच अपने घर लौटे तो भाजपा और विश्वहिंदू परिषद के लोगों ने भारी भीड़ के साथ उनको कंधे पर बैठा कर रैली निकाली. फूल बरसाये और पटाखे छोड़े. डीजे बजाकर डांस किया. इस आतंकोत्सव में स्थानीय भाजपा नेता सुरभिबेन तमाकूवाला और विहिप के विरल देसाई और स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ता शामिल थे. ये दोनों सजायाफ्ता कैदी आरएसएस से हैं. कहा जा रहा है कि पूर्व आरएसएस सदस्य हैं.

हमें नहीं पता कि आरएसएस और भाजपा के लोग क्या चाहते हैं. लेकिन आज ही के दिन गौरी लंकेश की हत्या हो गई थी. मोदीजी के ट्विटर के हीरो, जिन्हें वे फॉलो करते हैं, उनको कुतिया कह रहे थे. फिर मोदी जी के मंत्री लिंच मॉब को माला पहना आए. अब यह नया गुल खिला है.

यह देश अकेले हमारा या किसी एक व्यक्ति का तो है नहीं. गांधी की हत्या पर मिठाई बांटने वालों का भी है. तिरंगा जलाने वालों का भी और आतंकवादियों को माला पहनाने वालों का भी. कानून की हत्या करने वालों का भी. आप भारत माता के असली सपूत होने का दावा भी करें और दोनों हाथ से इस देश को, इसके कानून को, अदालतों को, व्यवस्था को और सिद्धांतों को आग लगाएं. यही आपकी देशभक्ति है. यह तो हम पहले से जानते हैं लेकिन सत्ता में आकर आप नंगे होते जा रहे हैं. शशि थरूर सही हैं. आपका सपना न्यू इंडिया नहीं है, आपका सपना हिंदू आतंकी इंडिया है. आपकी प्रतियोगिता पाकिस्तान के नरक से है. आप वहीं पहुंचना चाहते हैं. लेकिन याद रखें, गांधी, आंबेडकर, भगत सिंह और नेहरू पटेल का भारत इस नरकयात्रा में आपका साथ नहीं देगा.

Courtesy: nationalspeak.

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