सर्वे का रिजल्ट देख उड़ीं भाजपा की नींदें, सर्वे में भाजपा की हार तय

सर्वे का रिजल्ट देख उड़ीं भाजपा की नींदें, सर्वे में भाजपा की हार तय

नई दिल्ली – 2014 में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने एतिहासिक जीत दर्ज की थी . जनता ने सरकार से कितनी आस लगा रखी थी .नरेन्द्र मोदी के वादो पर जनता ने आँख बंद करके भरोसा किया . पर 2018 आते आते न तो 15 लाख रूपए खाते में आये, न बुलेट ट्रेन चली, न रोज़गार बढ़े और न महंगाई कम हुयी. यही सब कारण नरेन्द्र मोदी को हीरो से विलेन बना सकते हैं.

अभी चुनाव में तो समय है पर बीजेपी का जनाधार काफी घट गया है . अगर सर्वो की मानें तो दिसंबर में होने वाले तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की हार तय है .अगर ऐसा हुआ तो 2019 में बीजेपी की वापसी की उम्मीदों को करारा झटका लग सकता है.

पिछले चार छः महीनों में राजनीति के पटल पे बहुत कुछ बदला है. कल जिस राहुल गांधी का मज़ाक बनाया जाता था आज लोग उनको गंभीरता से ले रहे हैं, उनको सून रहे हैं उन पर विश्वास कर रहे हैं . सर्वों से पता चलता है नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ़ गिर रहा और राहुल गांधी का ऊपर उठ रहा है . यह बीजेपी और संघ के लिए अच्छी ख़बर नहीं है. दूसरा बड़ा परिवर्तन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर में चुनाव के समय देखने को मिला.

यहाँ बीजेपी की हार हुई जबकि यह मुख्यमंत्री योगी का संसदीय क्षेत्र था . यहाँ एसपी और बीएसपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था . इसके बाद सभी धर्म निरपेक्ष दलों को यह बात समझ आ गयी कि अगर वह मिल कर चुनाव लड़ें तो बीजेपी को आसानी से हरा सकते हैं . 2014 में बिखरे विपक्ष को 69% वोट मिले थे जबकि बीजेपी को 31% वोट मिले थे.

फिर हिन्दू समाज का वह ढांचा जिसे संघ और बीजेपी नि मुसलमानों का भय दिखा कर खड़ा किया था वह चरमरा रहा है. आज किसान पहले किसान, दलित पहले दलित, ओबीसी पहले ओबीसी है बाद में हिन्दू है. व्यापारी वर्ग भी सरकार से नाराज़ है. शहरी नक्सल के नाम पर हुई गिरफ्तारियों से भी सरकार के खिलाफ माहौल बन रहा है. ऐसे में अगर विपक्ष महागठबंधन बनाने में सफल होता है तो 2019 में राहुल गांधी की अगुवाई में एक नया भारत उभर सकता है.

Courtesy: nationalspeak

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