मोदी से नाराज़ लोगों ने निकाला विरोध का अलग ही तरीका, ‘पीएम मोदी के पंचिंग बैग पर बरसाईं लात’

मोदी से नाराज़ लोगों ने निकाला विरोध का अलग ही तरीका, ‘पीएम मोदी के पंचिंग बैग पर बरसाईं लात’

नई दिल्ली – दक्षिण भारत के राज्य केरल के कोच्चि स्थित मेरिन ड्राईव के रेनबो पुल के पास बीते रविवार  को एक पंचिंग बैग था। लोग उस पंचिंग बैग पर पंच कर रहे थे। अब आप कहेंगे कि इसमें नया क्या है, लेकिन हम आपको बता दें कि यह कोई साधारण पंचिंग बैग नहीं था, बल्कि इसके उपर प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा बनाया गया था।

इस पंचिंग बैग के मालिक ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन ने मरीन ड्राईव के दर्शकों को दो विकल्प दिए- एक कि वे बैग को गले लगा सकते हैं अगर उन्हें लगता है कि केंद्र सरकार ने आम लोगों के लिए अच्छा काम किया है और दूसरा विकल्प था कि वे इससे विपरीत सोंचते हैं तो वे जितना चाहे इसके ऊपर पंच और लात मार सकते हैं। आयोजकों के मुताबिक, “इस इवेंट ‘पंच मोदी चैलेंज’ में शिरकत करने वाले करीब 500 लोगों में से किसी एक ने भी इसे गले नहीं लगाया, बल्कि सभी ने पंच और लात मारे।” अब इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, AISF के एर्नाकुलम जिला अध्यक्ष एमआर हरिकृष्णन ने मीडिया से कहा कि, “हमारे देश की वर्तमान स्थिति काफी दयनीय है। तेल की कीमतें हर रोज़ बढ़ रही है। जीवन जीना मुश्किल हो गया है। इस सब से हटकर मलयालयी लोगों के पास बाढ़ राहत अभियान में उचित सहायता उपलब्ध न कराने को लेकर केंद्र सरकार के विरोध करने का मुद्दा है।

उन्होंने बताया कि संगठन विरोध करने का कुछ अलग तरह का कैंपेन करना चाहता था। इसलिए ‘मोदी पंच चैलेंज’ का आयोजन किया गया। उन्होंने अमेरिका का हवाला देते हुए कहा कि हाल ही में अमेरिका में भी डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ इसी तरह का आयोजन किया गया था। हम प्रधानमंत्री मोदी को टारगेट नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनके चेहरे को केंद्र सरकार के प्रतीक के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। हमारा इरादा उन्हें चोट पहुंचाने का नहीं है।

इस कार्यक्रम में न सिर्फ मलयालयी लोगों ने हिस्सा लिया बल्कि देश के विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लोग भी इस कार्यक्रम शामिल हुए। हरिकृष्णन ने कहा कि, यहां मौजूद तमाम महिलाएं इस बात से नाराज थीं कि केंद्र सरकार ने बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए उचित सहायता उपलब्ध नहीं करायी है। यहां मौजूद पुरुष पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से नाराज थे। वहीं, दूसरे राज्यों के लोग 15 लाख देने के वादे को पूरा नहीं करने की वजह से गुस्से में थे।

Posted by ReportLook on Saturday, 15 September 2018

 

Courtesy: nationalspeak.

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