सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सवा चार साल में पहली बार पीएमओ ने बुलाई इस कमिटी की बैठक

सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सवा चार साल में पहली बार पीएमओ ने बुलाई इस कमिटी की बैठक

प्राइवेट सेक्टर की सरकार के साथ इस तरह की पहली बैठक साल 2006 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुई। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव ने की थी। इसके बाद यूपीए सरकार के साल 2014 तक के कार्यकाल में इस तरह की कुल 7 बैठकें आयोजित की गईं।

केन्द्र की मोदी सरकार ने सत्ता में आने के सवा चार साल बाद प्राइवेट सेक्टर की पहली बैठक आयोजित की है। यह बैठक प्राइवेट सेक्टर द्वारा देश की प्रगति में सहयोग के लिए किए जाने वाले सकारात्मक कार्यों के संबंध में थी। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, यह बैठक 22 सितंबर को आयोजित की गई थी, जिसमें देश के प्राइवेट सेक्टर द्वारा एससी-एसटी वर्ग को नौकरी देने के दावों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, प्राइवेट सेक्टर द्वारा इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिस पर सवाल उठे। उल्लेखनीय है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब देशभर में विभिन्न जातीय संगठन जैसे दलित, जाट, मराठा, ऊपरी जातियों के लोग अलग-अलग मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

बता दें कि प्राइवेट सेक्टर की सरकार के साथ इस तरह की पहली बैठक साल 2006 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुई। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव ने की थी। इसके बाद यूपीए सरकार के साल 2014 तक के कार्यकाल में इस तरह की कुल 7 बैठकें आयोजित की गईं। लेकिन साल 2014 में सत्ता में आने वाली एनडीए सरकार की यह पहली बैठक है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के लोगों ने भी इस बात को लेकर सवाल उठाए हैं कि इस बैठक में इतनी देर क्यों की गई? बहरहाल 22 सितंबर को कॉर्डिनेशन कमेटी ऑन अफर्मेटिव एक्शन द्वारा आयोजित की गई इस बैठक में देश भर से इंडस्ट्री चैम्बर के प्रमुख शामिल हुए।

इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन ने भारतीय उद्योगों द्वारा स्किल डेवलेपमेंट, स्कॉलरशिप और एससी-एसटी वर्ग के लोगों को दिए रोजगार के बारे में एक प्रजेंटेशन दी। बैठक में शामिल एक अधिकारी का मानना है कि प्राइवेट सेक्टर ने अपनी जिम्मेदारियों को उस तरह से नहीं निभाया है, जैसी कि उससे उम्मीद थी। अब सरकार ने 22000 ऐसे गांवों की लिस्ट तैयार की है, जिनमें एससी-एसटी जनसंख्या काफी ज्यादा है। सरकार ने प्राइवेट सेक्टर से इन गांवों को गोद लेने को प्रेरित किया है, ताकि यहां स्किल ट्रेनिंग देकर समाज के निचले तबकों को नौकरियां दी जा सकें। इसके साथ ही सरकार ने प्राइवेट सेक्टर को एसटी वर्ग के युवाओं को स्कॉलरशिप देने के लिए भी प्रेरित किया है। कुल मिलाकर इस बैठक का उद्देश्य देश के प्राइवेट सेक्टर को सकारात्मक कामों की तरफ प्रेरित करना था।

इस बैठक में इंडस्ट्री चैंबर्स CII, FICCI, और एसोचैम के सदस्यों ने सरकार को वह डाटा भी उपलब्ध कराया, जिनके तहत उन्होंने एससी-एसटी युवाओं को नौकरियां और स्किल ट्रेनिंग उपलब्ध करायी हैं। जिसके तहत CII ने ही पिछले 10 सालों में देश के करीब 1.2 लाख एससी-एसटी युवाओं को नौकरियां दी हैं।

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