योगी सरकार के तेज़ाबी हमले से शीरोज़ को बचाया सुप्रीम कोर्ट ने, बंद करने पर 9 महीने का स्टे!

योगी सरकार के तेज़ाबी हमले से शीरोज़ को बचाया सुप्रीम कोर्ट ने, बंद करने पर 9 महीने का स्टे!

लखनऊ का चर्चित शीरोज़ हैंगआउट फ़िलहाल बंद नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने आज स्टे देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को 9 महीने में मामले की सच्चाई सामने लाने का निर्देश दिया है। शीरोज़ तेजाबी हमले की शिकार महिलाओं द्वारा चलाया जाता है। करीब 15 ऐसी महिलाएँ यहाँ काम करती हैं।

यह हैंगआउट, लखनऊ के गोमतीनगर में मशहूर आंबेडकर पार्क के सामने है जहाँ शेफ़ से लेकर वेटर तक, सभी ‘एसिड सर्वाइवर्स’ हैं। यहाँ किताबें पढ़ने की भी सुविधा है। तमाम प्रदर्शनियाँ आयोजित होती हैं। गोष्ठियां और छोटे-मोटे कार्यक्रम भी होते रहते हैं।

अखिलेश यादव की सरकार के दौरान उन्हें यह जगह आवंटित की गई थी, लेकिन योगी सरकार की ओर से 30 अक्टूबर तक जगह खाली करने का निर्देश दिया गया था। पीड़ितों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट  में अर्ज़ी दी, जहाँ राहत नहीं मिलने पर वे सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं। ज़ाहिर है, इसकी पहचान एक लखनऊ में एक ‘प्रगितशील’ केंद्र के रूप में होने लगी थी, जो शायद सरकार को रास नहीं आ रहा था।

योगी सरकार ने इसे बंद करने का फ़ैसला यह कहते हुए लिया कि यह जगह महज कुछ मौखिक आश्वासनो के तहत दी गई थी। ठीक से लिखा-पढ़ी नहीं हुई थी। लेकिन पीड़ित महिलाओं का कहना है कि यह उनके रोज़गार का अकेला ज़रिया है जिसे योगी सरकार छीन रही है। एक आरोप यह भी है कि बहुत कम समय में यह जगह काफ़ी चर्चित हो गई है तो इसे बीजेपी के किसी प्रिय ठेकेदार को देने की साज़िश हो रही है। यह मुद्दा लखनऊ मे ंकाफ़ी गरम हो गया जब नागरिकों ने कैंडल मार्च निकाला और अखिलेश यादव से लेकर राजबब्बर तक समर्थन जताने पहुँचे।

बहरहाल, कुछ दिन पहले महिला एवं समाज कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोपों को महज़ राजनीति क़रार दिया था। उनके मुताबिक छाँव फाउंडेशन को कैफे चलाने के लिए दो साल के लिए अनुबंध पर जगह दी गई थी, जो समय ख़त्म हो गया है। उन्होंने छाँव फाउंडेशन के कामकाज में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया था।

 

Courtesy: mediavigil.

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