मोदी राज में आरटीआई रैंकिंग में भी पिछड़ा भारत, 6ठे स्थान पर पहुंचा, मनमोहन सरकार में था नंबर 2 पर

मोदी राज में आरटीआई रैंकिंग में भी पिछड़ा भारत, 6ठे स्थान पर पहुंचा, मनमोहन सरकार में था नंबर 2 पर

अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था एक्सेस इन्फो यूरोप और सेन्टर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी की ग्लोबल आरटीआई रैंकिग में भारत लुढ़ककर 6ठे स्थान पर पहुंच गया है। जबकि डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान इस रैंकिंग में भारत लगातार दूसरे नंबर पर था।

मानवाधिकार, ग्लोबल हंगर इंडेक्स और रोजगारपरक अर्थव्यवस्था के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज में भारत अब सूचना का अधिकार (आरटीआई) रैंकिंग में भी पिछड़ गया है। विश्व के 123 देशों की आरटीआई रैंकिंग की लिस्ट में खराब प्रदर्शन के कारण भारत पहले के मुकाबले लुढ़ककर 6ठे स्थान पर चला गया है। जबकि साल 2011 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान इस रैंकिंग में भारत विश्व में दूसरे नंबर पर था। साल 2011 में ही आरटीआई के क्षेत्र में ग्लोबल रेटिंग की शुरुआत हुई थी।

मानवाधिकार के क्षत्र में काम करने वाली विदेशी गैर सरकारी संस्था एक्सेस इन्फो यूरोप और सेन्टर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी ने यह आरटीआई रैंकिंग जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2011, 2012 और 2013 में ग्लोबल रेटिंग में भारत नंबर 2 पर था लेकिन उसके बाद के वर्षों में भारत अपने स्थान से लुढ़कता चला गया। इस समय भारत विश्व में स्लोवेनिया, श्रीलंका, सर्बिया, मैक्सिको और अफगानिस्तान से भी पीछे जाकर छठे नंबर पर पहुंच गया है।

एक्सेस इन्फो यूरोप और सेन्टर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में भारत में आरटीआई के तहत कुल 66.6 लाख आवेदन आए। जिनमें से करीब 7.2 फीसदी यानी लगभग 4.8 लाख आवेदनों को खारिज कर दिया गया, जिसके बाद मात्र 18.5 लाख आवेदन ही अपील के लिए सीआईसी तक पहुंचे। यही नहीं, इस दौरान सीआईसी ने आवेदकों की अपील पर सुनवाई के बाद 1.9 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत में सिर्फ 10 राज्यों ने ही इससे जुड़ी वार्षिक रिपोर्ट अपडेट की है। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में सूचना आयोगों में कुल 30 फीसदी पद खाली हैं। देश भर के सूचना आयोगों में कुल स्वीकृत पद 156 हैं, जिनमें से 48 पद खाली हैं। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 राज्यों के राज्य सूचना आयोग में कोई पद खाली नहीं है।

गैर सरकारी संस्था एक्सेस इन्फो यूरोप और सेन्टर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी की इस रैंकिंग में विश्व के 123 देशों में सूचना का अधिकार कानून की विशेषताओं और खामियों के पहलुओं की समीक्षा की जाती है और वैश्विक स्तर पर एक लिस्ट तैयार की जाती है। इस लिस्ट को तैयार करने में 61 इंडिकेटर्स को कुल सात मानकों में विभाजित कर विभिन्न देशों में आरटीआई से जुड़ी सुविधाओं की स्थिति का परीक्षण किया गया है। इसके साथ ही इस लिस्ट को विभिन्न देशों में आरटीआई तक पहुंच का अधिकार, कानून का दायरा, अपील, अनुमोदन, अपवाद, इनकार और सुरक्षा के साथ ही आरटीआई को बढ़ावा देने के लिए किये जा रहे प्रचार-प्रसार के सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है।

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