नाम बदलने में महारथी योगीजी क्या आप अपने ‘विकास’ के नारे को बदलकर ‘विनाश’ करेंगे? : प्रकाश राज

नाम बदलने में महारथी योगीजी क्या आप अपने ‘विकास’ के नारे को बदलकर ‘विनाश’ करेंगे? : प्रकाश राज

इलाहाबाद का नाम बदलने जाने को लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। योगी सरकार के इस फ़ैसले का जहां संत समाज ने स्वागत किया है, वहीं विपक्षी नेताओं से लेकर पत्रकारों और देश की कई मशहूर हस्तियों ने इसपर ऐतराज़ जताया है।

इसी फेहरिस्त में अब बॉलीवुड एक्टर प्रकाश राज का नाम भी जुड़ गया है। मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखने वाले प्रकाश राज ने योगी सरकार के इस कदम की आलोचना की है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “इलाहाबाद से प्रयागराज… नाम बदलने में महारथी योगी जी… क्या आप अपने विकास के नारे को बदलकर विनाश करेंगे…यूं ही पूछा”।

 

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि योगी सरकार ने शहर के हालात बदलने की जगह शहर का नाम बदल दिया। जितने पैसे नाम बदलने को लेकर खर्च किए जा रहे हैं अगर वो पैसे शहर में बंद पड़ी फैक्ट्रियों पर लगाए जाते तो बड़ी तादाद में लोगों को रोज़गार के लिए शहर से पलायन न करना पड़ता।

‘क्या शहर की तरह बैंक और हाईकोर्ट का नाम भी इलाहाबाद से बदलकर प्रयागराज रखा जाएगा?’
लेकिन सरकार समस्याओं का समाधान करने की बजाए नाम बदलने को तरजीह दे रही है। गोरखपुर में पिछले साल ही सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की वजह से कई बच्चों की मौत हो गई थी।

बताया गया कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी को सरकार ने भुगतान नहीं किया था। जिसके चलते सप्लाई रोक दी गई और कई बच्चों की मौत हो गई।

बॉलीवुड सिंगर विशाल ददलानी ने नाम बदले जाने को गोरखपुर की घटना से जोड़ते हुए पूछा, “अगर गोरखपुर का नाम बदल दिया जाये तो क्या अस्पतालों में बच्चों को ऑक्सीजन मिल जायेगा”?

अगर गोरखपुर का नाम बदल दिया जाये तो क्या अस्पतालों में बच्चों को ‘ऑक्सीजन’ मिल जायेगा?
इससे पहले कई विपक्षी नेताओं ने भी योगी सरकार के इस कदम की आलोचना की थी। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बताया था। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे ढ़ोंग करार दिया था।

ग़ौरतलब है कि लंबे समय से संत समाज इलाहाबाद का नाम बदलने की मांग कर रहा था। अगले साल यहां कुंभ मेले का आयोजन होना है और अगले साल ही लोकसभा के लिए चुनाव होने हैं।

ऐसे में यह माना जा रहा है कि राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर सरकार से नाराज़ संत समाज को मनाने के लिए यह फ़ैसला लिया गया है।

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