वरुण गांधी बोले- सांसदों की संपत्ति का मुद्दा उठाया तो पीएमओ से आ गया फोन

वरुण गांधी बोले- सांसदों की संपत्ति का मुद्दा उठाया तो पीएमओ से आ गया फोन

वरुण गांधी बोले- सांसदों की संपत्ति का मुद्दा उठाया तो पीएमओ से आ गया फोन

 

बीजेपी सांसद वरुण गांधी अक्सर पार्टी लाइन से अलग हटकर दिए बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं. वरुण पहले भी रोहिंग्या, तो कभी गिरते रुपये पर मोदी सरकार पर सवाल खड़े कर चुके हैं.

बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने मंगलवार को एक खुलासा करते हुए कहा कि जब उन्होंने सांसदों की वेतन वृद्धि और संपत्ति के ब्योरा नहीं देने को लेकर सवाल उठाए तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से फोन आया और कहा गया कि “आप हमारी मुसीबत क्यों बढ़ा रहे हैं.”

पीएमओ से आया फोन

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी ने हरियाणा के भिवानी में आदर्श महिला कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह बार-बार सांसदों के वेतन में वृद्धि और संपत्ति का ब्योरा नहीं देने को लेकर आवाज उठाते हैं. वरुण ने कहा कि हर वर्ग के कर्मचारी अपनी मेहनत और ईमानदारी के हिसाब से वेतन बढ़वाते हैं, लेकिन पिछले 10 सालों में सांसदों ने केवल हाथ उठवाकर 7 बार अपना वेतन बढ़वा लिया. और जब उन्होंने यह मुद्दा उठाया तो एक बार पीएमओ से फोन आया कि क्यों आप हमारी मुसीबतें बढ़ा रहे हैं.

हालांकि वरुण गांधी ने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री के आभारी है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कदम उठाया. अब सांसदों का वेतन केवल हाथ उठाने से नहीं बढ़ेगा, बल्कि संसदीय समिति तय करेगी.

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए वरुण गांधी ने यूपी के स्कूलों का उदाहरण दिया. उन्होने कहा कि यूपी के स्कूलों में शिक्षा के अलावा सभी कार्यक्रम होते हैं. यूपी के स्कूलों में आज धार्मिक व शादी के कार्यक्रम होते हैं, अंतिम संस्कार के बाद की क्रिया यहीं पूरी की जाती है, बच्चे क्रिकेट खेलते हैं और नेता स्कूलों में भाषण देने आते हैं.

वरूण गांधी ने कहा कि हर साल शिक्षा पर कहने के 3 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन 89 फीसदी पैसा भवनों पर खर्च होता है जिसे शिक्षा नहीं कह सकते. उन्होने कहा कि आज देश में साढे पांच लाख शिक्षकों की कमी है जिसे देश के सभी पोस्ट ग्रेजुएट एक साल मुफ्त पढ़ा कर एक झटके में पूरा कर सकते हैं.

किसानों की बदहाली की बात

वरूण गांधी ने कहा कि आज देश में 40 फीसदी किसान ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं, जो गैरकानूनी है. क्योंकि ऐसे किसानों को ना तो सरकार की कोई मदद मिलती, ना ऋण मिलता और ना फसल बर्बाद होने पर मुआवजा मिलता है. उन्होने कहा कि पिछले 10 सालों में किसानों की फसलों पर लागत तीन गुना बढी है, जिससे परेशान होकर विदर्भ के 17 हजार किसानों ने आत्महत्या की.

उन्होंने देश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार को लेकर कहा कि जब तक पारदर्शिता नहीं आएगी तब तक इस पर रोक नहीं लग सकती.

 

 

 

Courtesy: Aajtak

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