विदेशी दौरे पर 165 दिन में 355 करोड़ लुटा आए मोदी फिर भी निवेशक भागे, ये दौरा है या फिजूलखर्ची ?

विदेशी दौरे पर 165 दिन में 355 करोड़ लुटा आए मोदी फिर भी निवेशक भागे, ये दौरा है या फिजूलखर्ची ?

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले वादा किया था कि वह अपने शासनकाल में भारत को विश्व गुरु बनाएंगे। उनके इस वादे पर जनता ने भरोसा किया और उन्हें देश की कमान सौंप दी।

प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने विदेशी यात्राओं का सिलसिला शुरु कर दिया। लोगों को लगा कि मोदी जी अपने वादे को पूरा करने के लिए विदेशों की खाक छान रहे हैं।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी अपने 48 महीनों के शासनकाल में 165 दिन बाहर रहे। उन्होंने इस दौरान 50 देशों का दौरा किया।

उनकी इन यात्राओं के दौरान सरकारी ख़ज़ाने से 355 करोड़ रुपए ख़र्च किए गए। लेकिन पीएम मोदी के इन ताबड़तोड़ विदेशी दौरों के बावजूद देश विकास के मोर्चे पर नाकाम रहा।

पीएम मोदी ने 100 स्मार्ट सिटीज़ बनाने का वादा किया था, 4 साल बीत जाने के बाद एक भी शहर स्मार्ट नहीं हुआ। हर राज्य में AIIMS की स्थापना करने का दावा किया था, जिसमें से अभी तक एक भी नहीं बन सका। दावा तो देश को बुलेट ट्रेन देने का भी किया था, लेकिन वो भी पूरा नहीं हुआ।

विदेशी दौरों के समय दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री दौरे इसलिए कर रहे हैं ताकि देश को वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर दे सकें। सड़कों के गड्ढ़े और बहते गटर पीएम मोदी के विदेशी दौरे कितने कामयाब हुए इसकी तसदीक़ आसानी से कर सकते हैं।

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी PM मोदी बुरी तरह फेल रहे हैं- सितम्बर से अबतक निवेशक शेयर बाज़ार में ख़राब अर्थव्यवस्था के चलते 17 लाख करोड़ से ज़्यादा गँवा चुके हैं।

प्रधानमंत्री के इन दौरों से देश को एक और बड़ी उम्मीद थी और वह यह कि विदेशों से संबंध अच्छे होने पर व्यापार को बढ़ावा मिलेगा जिससे नौजवानों को रोज़गार मिलेगा और महंगाई कम हो जाएगी।

लेकिन पीएम मोदी की ताबतोड़ विदेशी यात्राओं के बाद नौजवानों को कितना रोज़गार मिला और देश में महंगाई का स्तर कितना घटा यह किसी से छुपा नहीं।

इस वक्त मोदी सरकार रोज़गार और महंगाई के मुद्दे पर विपक्षियों के निशाने पर है। देश में नौकरियां घटी हैं तो पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

एक तरफ़ सरकार जीडीपी को मापने के नए मेथड लाकर जीडीपी की ग्रोथ दिखाकर लोगों को गुमराह कर रही है, वहीं रुपये का गिरता स्तर हमारी अर्थ व्यवस्था की सही तरजुमानी कर रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि पीएम मोदी के विदेशी दौरों पर खर्च किए गए बेशुमार पैसों से देश को आख़िर क्या हासिल हुआ? जब इससे देश का विकास नहीं हुआ तो इन दौरों को करने का क्या मक़सद था?

क्या पीएम मोदी को दुनिया घूमने का शौक था जिसके चलते उन्होंने यह दौरे किए? क्या पीएम के शौक पर सरकारी ख़ज़ाने से इतने पैसे ख़र्च किए जा सकते हैं?

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