रघुराम राजन बोले- मोदी के नेतृत्व में भारत का भविष्य खतरे में है, नोटबंदी-GST से बेहाल है देश

रघुराम राजन बोले- मोदी के नेतृत्व में भारत का भविष्य खतरे में है, नोटबंदी-GST से बेहाल है देश

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर में रुकावट की वजह नोटबंदी और जीएसटी को बताया है। साथ ही राघुराम राजन ने कहा है कि भारत की मौजूदा 7 प्रतिशत वृद्धि दर देश की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

भट्टाचार्य लेक्चरशिप नाम के इस कार्यक्रम का टॉपिक ‘फ्यूचर ऑफ इंडिया’ था। राघुराम राजन ने नोटबंदी से पहले के साल 2014 और 2016 के बीच भारत की वृद्धि को तेज माना है।

रघुराम राजन के अनुसार नोटबंदी के बाद भारत की आर्थिक वृद्धि में रुकावटे उस समय आनी शुरू हुईं जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही थी।

साथ ही अपनी ऊर्जा की जरूरतों के लिए तेल पर भारत की निर्भरता का जिक्र करते हुए रघुराम राजन ने कहा है कि भारत की विकास दर एक बार फिर रफ्तार पकड़ रहीं है। लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें इसमें एक बड़ी बाधा है।

तेल की कीमतें तेजी से गिरने के बाद अब लगातार बढ़ रहीं हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। बैंकों के बढ़ते एनपीए पर बोलते हुए रघुराम राजन ने कहा कि ऐसी हालत में सबसे बढ़िया चीज इसका सफाया करना है। उन्होंने कहा है कि फंसे कर्ज से निपटना जरूरी है ताकि बैलेंस शीट ठीक रहे और बैंक पटरी पर आ सके।

राजन ने जोर देते हुए कहा कि बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या दूर करने के लिए बैंक बैंकरप्सी कोड से ही मदद नहीं मिलेगी। लेकिन यह व्यापक क्लीन अप प्लान का एक औजार है जो देश में एनपीए की समस्या को दूर करने के लिए बहुसूत्री दृष्टिकोण का आह्वान करता है.

पूर्व गवर्नर ने कहा है कि भारत की अभी भी 7 फीसदी की वृद्धि दर भारत में विकास की अपार क्षमताओं को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि अगर विकास दर सात फीसदी से नीचे जाती है, तो हमसे कुछ गलती हो रही हो रही है।

साथ ही राजन ने कहा है कि मौजूदा वक्त में देश तीन महत्वपूर्ण बाधाओं से गुजर रहा है। पहला इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो प्रारंभिक स्तर पर अर्थव्यवस्था को प्रेरित करता है।

दूसरा, बिजली क्षेत्र की बधाएं हैं. जिन्हें दूर करने के लिए अल्पकालिक लक्ष्य बनना चाहिए, ताकि पैदा हुई बिजली वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी जरूरत है। तीसरी अहम बाधा बैंकों का लगातार बढ़ रहा एनपीए है।

Courtesy: boltahindustan.

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