आंकड़े ,नोटबंदी के बाद रिटर्न नहीं भरने वाले 80 हजार लोगों पर नजर: सीबीडीटी

आंकड़े ,नोटबंदी के बाद रिटर्न नहीं भरने वाले 80 हजार लोगों पर नजर: सीबीडीटी

नई दिल्ली. आयकर विभाग को ऐसे 80,000 लोगों की तलाश है जिन्होंने नोटबंदी के बाद बैंक में बड़ी रकम जमा कराई। लेकिन, नोटिस भेजने के बावजूद आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया है। सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने बुधवार को बताया कि 80 लाख ऐसे लोगों की भी पहचान की गई है जिन्होंने पिछले 3 साल के दौरान रिटर्न फाइल किया, लेकिन इस साल अभी तक फाइलिंग नहीं की है। उम्मीद है आने वाले दिनों में ये रिटर्न भरेंगे। इस साल अभी तक 6.02 करोड़ रिटर्न फाइल हुए हैं। इनमें 86 लाख नए टैक्सपेयर हैं। पिछले साल 6.85 करोड़ लोगों ने रिटर्न भरा था।

3 लाख लोगों को नोटिस, इनमें से 2.2 लाख ने ही रिटर्न भरा

  1. सीबीडीटी के चेयरमैन चंद्रा ने कहा कि नोटबंदी से करदाता और आयकर संग्रह दोनों बढ़ाने में मदद मिली है। पैसा अब बैंकों में है इसलिए यह जानना आसान है कि कितने लोगों ने बड़ी रकम जमा कराने के बावजूद रिटर्न नहीं भरा। करीब 3 लाख लोगों को नोटिस भेजा था। इसके बाद 2.2 लाख लोगों ने रिटर्न फाइल किया। बाकी 80,000 के बारे में आयकर विभाग पता लगा रहा है।
  2. रिटर्न में देरी वाले 30 लाख लोगों की भी पहचान

    सीबीडीटी के मुताबिक विभाग समय पर रिटर्न नहीं भरने वालों की पहचान भी कर रहा है। इस साल 30 लाख ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिन्हें रिटर्न भरना था। अभी उन्हें मैसेज भेज रहे हैं। जवाब नहीं मिला तो उन्हें नोटिस देंगे।

  3. बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा रहेगा कर संग्रह

    अभी तक 5 लाख करोड़ रुपए प्रत्यक्ष कर संग्रह हुआ है। बजट में 11.5 लाख करोड़ का लक्ष्य था। वास्तविक कलेक्शन इससे ज्यादा रहने की उम्मीद है। जिन क्षेत्रों में कलेक्शन कम है, वहां जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

  4. टीडीएस काटने वाले समय पर टैक्स भरें

    टीडीएस काटने वालों को भी फॉलो किया जा रहा है। उनसे समय पर टैक्स काटने और सरकार के पास जमा कराने संबंधी निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी तरह एडवांस टैक्स पेमेंट करने वालों से भी इस पर बात की जा रही है।

  5. आयकर विभाग के प्रमुख के बयान से मेल नहीं खाते आंकड़े

    सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि पिछले साल सरकार के कुल टैक्स कलेक्शन में 52% हिस्सा डायरेक्ट टैक्स और 48% इनडायरेक्ट टैक्स का था। ऐसा कई साल बाद हुआ है जब डायरेक्ट टैक्स, इनडायरेक्ट से ज्यादा रहा हो। पर विभाग के ही आंकड़े बताते हैं कि 2007-08 से 2015-16 तक लगातार डायरेक्ट टैक्स संग्रह इनडायरेक्ट से ज्यादा था। 2009-10 में इसका हिस्सा सबसे ज्यादा 60.78% था।

     

    साल डायरेक्ट टैक्स
    2013-14 56.32%
    2014-15 56.16%
    2015-16 51.03%
    2016-17 49.65%
    2017-18 52.29%

     

Categories: Finance

Related Articles