भूखे का पेट ना ‘हिंदू’ देखता है ना ‘मुसलमान’ ! ना उसे मंदिर चाहिए ना मस्जिद ये बात कब समझेंगे ये नफरती?

भूखे का पेट ना ‘हिंदू’ देखता है ना ‘मुसलमान’ ! ना उसे मंदिर चाहिए ना मस्जिद ये बात कब समझेंगे ये नफरती?

पिछले दो दशकों से ज्यादा वक़्त से अटके राम मंदिर मुद्दे पर एक बार फिर से सियासत शुरू हो गई। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही शिवसेना, विश्व हिंदू परिषद् और संघ ने एक बार फिर अयोध्या में डेरा जमा लिया।

हर टीवी न्यूज़ चैनल हर अख़बार पर सिर्फ राम मंदिर का मुद्दा ही चर्चाओं में था मगर इसी बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई जिसे देख गरीबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

एक तस्वीर जो अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद पर एक करारा तमाचा है। जो दर्शा रही है की धार्मिक होने से पहले पेट भरना ज़रूरी होता है।

इस तस्वीर में एक बुजुर्ग दिखाई दे रहा है जिसमें साफ़ देखा जा सकता है की वो कार्यकर्ताओं को मिले खाने के डिब्बे से खाने की तलाश में की जिससे उसे कुछ मिल जाए और उसका पेट भर सके।

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राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का फैसला जब आएगा तब आएगा मगर उससे पहले ये मामला भी तय किया जाना चाहिए देश या प्रदेश में कोई भी इंसान भूखे पेट न सोये या फिर सरकारी राशन की दुकानों की लाइन में खड़े खड़े दम न तोड़े।

क्योंकि पिछले कई सालों से मंदिर मस्जिद की इस लड़ाई में कभी ये बात किसी सरकार ने नहीं की अब देश में कोई खाली पेट नहीं सोयेगा क्योंकि भूखे का पेट ना हिंदू देखता है और ना ‘मुसलमान’।

ना उसे मंदिर चाहिए ना मस्जिद उसे सिर्फ दो वक़्त की रोटी चाहिए जिसके लिए वो हर बार किसी भी पार्टी का झंडा उठाकर चल देता है सिर्फ इसलिए क्योंकि उसे सरकार से उम्मीद रहती है की वो उसके लिए कुछ बेहतर करेगी मगर धर्म पर राजनीति करने वालों को ये बात कब समझ आएगी और कब ये नफरती समझेंगें की धर्म से ज्यादा ज़रूरी रोटी होती है उसके बाद ही कुछ होता है।

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सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस तस्वीर पर अपने विचार व्यक्त किये है, एक यूज़र ने लिखा अयोध्या में रैली के दौरान फेंके गये लंच पैकेट्स से पूड़ियां अपने और अपने परिवार के लिए बटोरते इस इंसान को क्या चाहिये,मंदिर-मस्जिद या रोटी।

अयोध्या में रैली के दौरान फेंके गये लंच पैकेट्स से पूड़ियां बटोरते इस इंसान को क्या चाहिये, मंदिर-मस्जिद या रोटी।

Courtesy: boltahindustan.

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