लोकतंत्र या लोलतंत्र?

लोकतंत्र या लोलतंत्र?

संविधान की शपथ ले कर आये थे, संविधान को चपत मारने से बाज़ ही नहीं आ रहे। पिछले साढ़े चार सालों से देश की जनता के ऊपर साढ़े साती की तरह छाय हैं, नाम बताने की ज़रुरत तो है नहीं, आप लोग समझदार हैं उनके कुकर्मों से उनका नाम खुद ही समझ गए होंगे। ख़ैर, कुछ ही सालों में देश की इतनी छीछालेदर कर डाली है की शायद गंगा तो फिर भी साफ़ हो जाये लेकिन देश न साफ़ हो पायेगा।

70 सालों में हिंदुस्तान को चाँद से उतार कर पाताल लोक में गाड़ने के लिए वर्तमान सरकार का ह्रदय से धन्यवाद। किसान, मजदूर, युवा, महिला, जवान: सब हैरान, सब परेशान।

2019 का चुनाव क्या आया मज़हबों को विस्फोटक की तरह इस्तेमाल करके ख़ूनी खेल की शुरुवात कर दी गयी। राम का तिरपाल हो या हनुमान की जात, ये निकम्मे बिना लोटा लिए पूरे देश में गंदगी मचा हैं। भाई आस्तीन के सांप से तो फ़िर भी निपटा जा सकता है लेकिन ये तो आस्तीन के एनाकोंडा निकले !!!

तो भइया अइसा है कि चुनाव सर पर देख ये लोग जंग लगी तलवार ले कर मैदान में कूद पड़े हैं और आप इतना तो समझते ही हैं कि हथियार में भले ही जंग क्यों न लगी हो लेकिन फिर भी वो अपना काम तो कर ही जाता है। जब ऊपर वाले ने नज़र दी है तो उस पर चश्मा चढ़ा कर बैठने का क्या मतलब??? ये लोग न तो राम के हैं न आम के हैं इसलिए हिन्दुस्तान की जनता से अनुरोध है कि भगवान् शिव बन कर इनका घोला हुआ विष पीना बंद करें और अगर शिव बनने का इतना ही शौक़ है तो उनके रौद्र रूप को अपनाएं। देश से पहले अपने परिवार, अपने बच्चों को बचाएं वर्ना साम्प्रदायिकता के इस ख़ूनी खेल के अंत में इन लोगों को छोड़ कर और कोई नहीं बचेगा।

कभी-कभी दिल में ख़्याल आता है कि अब तो राम-हनुमान भी ऊपर बैठे ये सब देखते होंगे तो इस देश की जनता से बड़ी विनम्रता से बस यही निवेदन करेंगे कि: बिना ज़मीन के भी ज़मीन कैसे बनायी जाती है ये वर्तमान सरकार के स्टार प्रचारक को बखूबी आता है, ये मत भूलिए कि वो पहले खिलाड़ी हैं बाद में पीएम। जहां डाल-डाल पर मूर्खों के चमचे करते हैं बसेरा, वो भारत देश है तुम्हारा। इसलिए तुम लोग इनके बहकावे में मत आना और अपनों को न काटना-कटवाना। ये तुम्हे हर बात पर भटकायेंगे लेकिन तुम भी अंगद के पांव की तरह अड़े रहना।अपने दिमाग की जगह अपने दिल का इस्तेमाल करो क्यूंकि दिमाग डरता है दिल से इसलिए दिमाग की सुनना तुम्हे सिर्फ हार की तरफ ही ले जायेगा… और इस देश में मुट्ठी भर लोग बस उसी का इंतज़ार कर रहे हैं।

सावधान रहें, सतर्क रहें

जय हिन्द

 

 

By: Aastha Agnihotri

Categories: Opinion
Tags: 4 Year, BJP, Hindu, India

Related Articles

Write a Comment