अब BJP सांसद ‘सावित्रीबाई फुले’ ने पार्टी छोड़ी, क्या यह 2019 से पहले ‘मोदी लहर’ का अंत है?

अब BJP सांसद ‘सावित्रीबाई फुले’ ने पार्टी छोड़ी, क्या यह 2019 से पहले ‘मोदी लहर’ का अंत है?

यूपी के बहराइच से BJP सांसद सावित्री बाई फुले ने अपनी ही पार्टी को निशाने पर लेते हुए कहा है कि पार्टी समाज को बांटना चाहती है. इस बयान के साथ ही फुले ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी या उसके किसी भी संगठन से कोई लेनादेना नहीं है. फुले ने यह भी ऐलान किया कि 23 दिसंबर को वह रमा बाई आंबेडकर मैदान में रैली करेंगी.

 

फुले की पहचान उत्तर प्रदेश में बीजेपी के एक बड़े दलित चेहरे के तौर पर रही है. हालांकि वह केंद्र और यूपी सरकार पर अक्सर निशाना साधती रही हैं और आज इस्तीफा देने के बाद भी उन्होंने पार्टी पर आरोप लगाए.

इससे पहले मंगलवार को फुले ने कहा था कि हनुमानजी दलित और मनुवादियों के गुलाम थे. उन्होंने कहा कि अगर लोग कहते है कि भगवान राम है और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमानजी ने किया था, उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया? फुले का यह बयान योगी आदित्यनाथ द्धारा हनुमान जी को दलित बताने के बाद आया था.

बीते दिनों योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के अलवर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए हनुमान को दलित और वनवासी बताया था. जिसके बाद से इस विवाद ने तूल पकड़ लिया.

‘देश को मंदिर की जरूरत नहीं’

एक ओर जहां बीजेपी के कई सांसद केंद्र और यूपी सरकार पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर दबाव बनाते रहते हैं तो वहीं फुले मानती हैं कि देश को मंदिर की जरूरत नहीं है.

हाल ही में उन्होंने राम मंदिर के सवाल पर कहा था कि बीजेपी इस मुद्दे को उछाल रही है जैसे कोई और मुद्दा है ही नहीं. उन्होंने कहा कि देश को मंदिर की जरूरत नहीं है, क्या मंदिर बेरोजगारी, दलित और पिछड़ों की समस्याओं को दूर कर सकता है. फुले ने कहा कि मंदिर से सिर्फ ब्राह्मणों को फायदा होगा, जिनकी आबादी सिर्फ तीन फीसद है. मंदिर में जो पैसा चढ़ता है उसी का इस्तेमाल कर ब्राह्मण हमारे दलित समुदाय को अपना गुलाम बनाते हैं.

 

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