राहुल गांधी- एक शालीन युग की शुरूआत!

राहुल गांधी- एक शालीन युग की शुरूआत!

राहुल गांधी- एक शालीन युग की शुरूआत!

 

 

5 राज्यों के चुनाव के नतीजे आ गए हैं… जिसमे से राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश ये 3 देश के प्रमुख राज्य हैं राजनीतिक और छेत्रफल के अनुसार भी और ये तीनों ही भाजपा शासित प्रदेश थे.

मध्यप्रदेश और छत्तीशगढ़ में तो पिछले 15 साल से भाजपा का ही कमल खिला था, पर इस बार अपने जुझारू अंदाज़ से सबको चौकते हुए कांग्रेस पार्टी ने ये तीनों राज्य जीत कर राहुल गाँधी को उनके अध्यक्ष बनने के पहले सालगिरह पर उन्हें सौगात दिया है और पंजा काबिज़ हो गया!


तेलंगाना और मिजोरम में कांग्रेस का प्रदर्शन ख़ासा अच्छा नहीं रहा, और दोनों ही राज्यों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा!
पर ताज़्ज़ुब की बात यह भी है कि, अपना हर हथकंडा अपनाने के बावजूद भाजपा तेलंगाना और मिजोरम में मात्र खाता भर खोल पाई और वहां भी उसे अपने मुँह कि खानी पड़ी…

 

 

फिलहाल आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान और मध्यप्रदेश में कांग्रेस बहुमत से 2-3 सीट पीछे ज़रूर संतोष करना पड़ा पर सयायक पार्टियों और निर्दलीयों ने कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े दिलाने में मदद पूरी कर दी…

और वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की अभूतपूर्ण और अप्रत्याशित जीत ने भाजपा के 15 साल के शासन ने सवालिया निशान खड़ा कर दिया है! भाजपा 15 के आंकड़े में ही सिमट गई…

कांग्रेस की इस बड़ी जीत के साथ ही भाजपा के लगातार आलोचना का प्रश्न ख़त्म हो गया कि, विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का चेहरा कौन है? क्योंकि वोट तो प्रधानमंत्री मोदी ने अपने नाम पर माँगा था… तो यकीनन हार मोदी कि हुई और कहने वाले यह भी कह रहे कि तथा कथित मोदी लहर भी लुढ़क ही गई.

राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष और अशोक गेहलोत, मध्यप्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और सांसद ज्योतिरित्या सिंधिया के चेहरों के होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी बस विकास के मुद्दों पर पंजे के निशान पर वोट मांगती दिखी… और स्टार प्रचारक रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी! जिन्होंने अपना सारा दमखम लगा दिया इन विधानसभा चुनावों के अंदर… और पार्टी के नताओं को भी कड़े सन्देश दिए कि गुजरात चुनावों में हुई गलतियों को दुबारा दोहराने कि जुर्रत ना करें, बता दे आपको कि राहुल गाँधी ने गुजरात के चुनाव पे भरपूर कोसिस किया पर अंत बेला पर कुछ नेताओं कि गलतियों के कारण सरकार बनाने से चूंक गए थे!

 

साथ ही, भाजपा के चुनाव हारने कि सबसे प्रमुख कारण हैं: योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमान जी कि जाती की व्याख्या, हैदराबाद का नाम बदलना और आलू की बिरयानी बनवाना… तथा, भाजपा द्वारा राहुल गाँधी कि जाती और गोत्र पर सवालिया निशान…!

बता दें, राहुल द्वारा प्रचार कि हुई 80% सीटें कांग्रेस के कैंडिडेट ने जीती हैं वहीँ मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ में प्रचार कि हुई सीटों पर 100% हार हुई हैं भाजपा की…

 

 

इस चनाव के साथ ही राहुल गांधी का लोहा मानने लगी है भाजपा और विपक्षी पार्टियां…
गौरतलब है कि, राहुल गाँधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से ही कांग्रेस एक लड़ाकू विमान कि तरह पार्टी में जोश आ गया है और उनके नए अंदाज़ से पार्टी लगातार जीत को साकार किए जा रही है…
बतौर अध्यक्ष राहुल की पहली अग्निपरीक्षा था गुजरात जहां सरकार तो नहीं बनी, पर भाजपा 99 के फेर में रह गई और कांग्रेस को जीत कि जादुई आंकड़े से कुछ ही दूर रहकर संतोष करना पड़ा!

दूसरी लड़ाई कांग्रेस ने कर्णाटक में लड़ी जहां कांग्रेस अपने दम पर तो सरकार नहीं बना पाई पर पूर्व प्रधानमंत्री श्री देवेगौड़ा की पार्टी (जिसे सबसे कम सीटें मिली) से समझौता कर एच.डी.कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बना वहां भी भाजपा को रोकने में कामयाब हुई.

 

और फिर आया ये 5 राज्यों का चुनाव, जिसमे नतीजे आपके सामने है… भाजपा को भारत के नक्शे से 2 फाड़ में बाँट दिया इस कांग्रेस कि जीत ने….

 

 

नतीजों के बाद जिस तरह से राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और शालीन व्यवहार का परिचय देते हुए जवाब दिए, इससे ये तो पता चल गया कि… हिंदुस्तान की राजनीति में एक शालिन युग की शुरुआत हो गई है।

 

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मैं आपको आश्वस्त कर दूं कि, अगर यूं ही राहुल का वेग ज़ारी रहा तो आगे आने वाले विधानसभा चुनावों में हरयाणा, झारखण्ड, महाराष्ट्र, दिल्ली, जम्मू-काश्मीर, असम आदि में मोदी की गलत नीतियों पर वार कर के और विकास का एक रोलमॉडल, किसानों, युवाओं को एक सशक्त भारत का अवसर दिखाकर कांग्रेस काफी अच्छा करने जा रही है और 2019 में मोदी को रोकना तो छोटी बात है, कांग्रेस सत्ता पे काबिज़ होने में भी कामयाब होगी…

 

जय हिन्द.

जल्दी मिलते हैं नए लेख के साथ.

 

आप अपने सुझाव निचे दे सकते हैं धन्यवाद।

सौरभ राय.

 

Categories: Opinion, Politics

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