यूपी में स्वच्छता की सूची में फिसड्डी साबित हुआ नरेंद्र मोदी का वाराणसी

यूपी में स्वच्छता की सूची में फिसड्डी साबित हुआ नरेंद्र मोदी का वाराणसी

स्वच्छ भारत सर्वे 2019 से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र और उत्तर प्रदेश का प्राचीन शहर वाराणसी सूबे में स्वच्छता की एक सूची में फिसड्डी साबित हुआ है। हाल में हुई राज्य स्तरीय स्वच्छ वॉर्ड प्रतियोगिता में काशी 90 वॉर्डों में एक स्थान पर भी अपनी जगह नहीं बना पाया। वहीं, चार सबसे स्वच्छ जिलों में गाजियाबाद, प्रयागराज (पहले इलाहाबाद), फर्रूखाबाद और झांसी के नाम शामिल किए गए हैं।

बता दें कि लगभग छह महीने पहले बनारस को यूपी का सबसे साफ शहर घोषित किया गया था। ऐसे में यह ताजा सूची इस प्राचीन नगरी और पीएम मोदी के लिए किसी झटके से कम नहीं मानी जा रही है। नगर निगम ने इस प्रतियोगिता में यूपी के सभी जिलों को 10 पैमानों पर मापा था। इनमें ठोस कचरे का प्रबंधन, आधारभूत ढांचे का विकास, शौचालय, हरियाली, क्लीन वॉर्ड को बढ़ावा देने वाले समिति की सहभागिता, तरह-तरह के कचरे को अलग करना, क्षमता का निर्माण करना, कार्यशैली में सुधार लाना और नागरिकों की प्रतिक्रिया सरीखी चीजें शामिल थीं। हर पैमाने के लिए कुल 200 अंक रखे गए थे, यानी कि 10 पैमानों के हिसाब से कुल 2000 अंकों में से जिलों को नंबर दिए गए।

25 दिसंबर को राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान ताजा सूची में सबसे साफ पाए जाने वाले जिलों को सम्मानित किया गया। हालांकि, नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके दुबे ने एक अंग्रेजी अखबार से इस बारे (वाराणसी को लेकर) में कहा, “हम इस मामले की जांच करेंगे और देखेंगे कि आखिर गड़बड़ी कहां हुई। हम राष्ट्रीय सर्वेक्षण में अपने प्रदर्शन में सुधार करेंगे।”

गौरतलब है कि साल 2014 और 2015 के स्वच्छ सर्वेक्षण (राष्ट्रीय स्तर पर) में काशी का 418वां पायदान था। आगे 2017 में इसमें काफी सुधार आया है और इसने शीर्ष 100 शहरों की सूची में अपनी जगह बनाई। 2017 में सबसे साफ शहरों की सूची में वाराणसी 32वें नंबर था, जबकि 2018 में इसकी रैंक 29 आ पहुंची थी। वहीं, यूपी में 2017 और 2018 में यह सबसे साफ शहर घोषित किया गया था।

Courtesy: jansatta

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