देश को चाटता, अशहिष्णुता का दीमक.

देश को चाटता, अशहिष्णुता का दीमक.

देश को चाटता, अशहिष्णुता का दीमक.

 

पीछे साढ़े 4 साल में आपने कुछ शब्दों का प्रयोग लगातार और लगभग हर महीने, तीसरे महीने तो ज़रूर सुन रहे होंगे… जैसे: राष्ट्रद्रोही, देश विरोधी, लिंचिंग, पाकिस्तान चले जाओ, सेडिशन, अवॉर्ड वापसी इत्यादि इत्यादि…

पर कभी आपने यह सोचा है कि, आखिर ये सारी शब्दावली आपको 2014 के बाद ही क्यों सुनने को मिली या काफी ज़्यादा सुनने में क्यों आईं? तो इसका जवाब है, केंद्र में बैठी मौजूदा सरकार के भ्रष्ट विचार… जो 2014 में तो “सबका साथ सबका विकास” के नारे पर आए थे, पर हुआ उल्टा- साथ तो सबका मिला पर विकास मात्र कुछ का.

हाल ही में अभिनेता नसरुद्दीन शाह ने बोला कि, ‘समाज में जिस तरह से गाय को इंसान से ज़्यादा तवज्जो दिया जा रहा है और एक पुलिसवाले की मौत से कहीं ज़ादा गाय चर्चा में है यह चिंतित करने वाला है। जैसे की गलतफहमी पैदा कर भीड़ किसी को भी मार दे रही है, मुझे अपने बच्चों को लेकर डर लगता है कि कल को मेरे बच्चों को घेर कर कोई भीड़ पूछे की तुम हिन्दू हो या मुसलमान- मुझे इस पर गुस्सा आ रहा है!…

 

 

तो उन्हें भी भाजपाइयों ने पाकिस्तान की टिकट पकड़ा दी और देशद्रोही करार दे दिया…
मानों राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट खुद के घर में छापते हों. पर ख़ुशी इस बात की है कि आशुतोष राणा, मधुर भंडारकर आदि जैसे अभिनेताओं ने भी नसरुद्दीन का साथ दिया, और संजय राउत जैसे तमाम राजनेताओं ने भी इसका समर्थन किया है… और लोग भी मन ही मन साथ दे रहे हैं पर आज के हलात से डरते हैं इसलिए डरते हैं साथ खड़े होने से.

 

पहले, आमिर खान ने भी अख़लाक़ के मारे जाने के बाद चिंता जताई थी और कहा था की मेरी बीवी किरण कहती हैं हमारे बच्चे यहाँ कैसे सुरक्षित रहेंगे? तब भी भाजपा और उसके सारे तंत्र आमिर के खिलाफ मुहीम में लग गई और बात इतनी बढ़ गई कि आमिर की स्नैपडील के ब्रांड एम्बेसडर से भी नमस्ते हो गई, पोलियो के ऐड से भी गायब कर दिया गया, जिसे वह मुफ्त में किया करते थे.

आप को बता दें, पिछले कुछ समय में अख़लाक़ (दादरी-यूपी), पहलू खान (अलवर-राजस्थान), रकबर (राजस्थान) आदि को गौ मांस और तस्करी के संदेह मात्र से मौत के घाट पर उतार दिया गया!

अभी बुलन्दशहर में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को मार दिया गया, भीड़ ने जुट कर गौ वंश के संदेह में पोलिसवाले को मार दिया और फिर दंगा फैलाने लगे… और जांच में पाया गया कि यह सब प्रपंच भाजपा, संघ और विश्व हिन्दू परिषद का ही रचा गया एक ड्रामा था!
तकरीबन 50 से ऊपर विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज की गयी है जिसमे एक फौजी भी शामिल है, उसे जम्मू से अरेस्ट किया गया है…

 

 

आपको बता दें कि यह एक बहुत ही बड़ी सोची समझी साजिश थी जिसके तहत बुलंदशहर को टारगेट कर पूरे प्रदेश में आग लगाने और अव्यवस्था खड़ी करने की जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद और भाजपा शासित दलों ने ली थी. आप यह सोचिए कि ये दंगा राजस्थान चुनाव के 3 दिन पहले की घटना थी, मामला साफ है कि यह चुनाव को डिस्टर्ब करने और पोलराइज करने का एक प्रपंच भी था।
आपको याद होगा एक दो और 3 नवंबर को बुलंदशहर में मुसलमानों की एक धार्मिक जमात/इज्तेमा थी जिसमें लाखों करोड़ों मुसलमान एकत्रित थे अब आप समझ सकते हैं कि इस मौके को भाजपा किस तरीके से भुनाना चाहती थी।
और आरोपी पकडे गए हैं तो पुष्टि भी हो चुकी है, पर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के लिए ज़रूरी यह नहीं है की कौन मरा या कौन आहत हुआ बल्कि यह है कि, गौकशी हुई है या नहीं. यह साफ़ है कि सरकार किसे वरियता दे रही है और गौ रक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों को पूरा सप्पोर्ट भी है, जो कि निहायत ही गलत काम को बढ़ावा दे रहा है समाज में…

 

 

मेरा पूछना यह है कि, डर का किसी मजहब से तालुख है क्या?
क्या हिन्दू को डर लगता है, तो वह नहीं बोलता या अपने बच्चों के लिए चिंतित नहीं होता? सिख, ईसाई या कोई भी समुदाय जो हिंदुस्तान से सम्बंधित है!
तो क्यों एक मुसलमान को अपने डर पर बोलने या चिंतित होने का अधिकार नहीं है? और अधिकार अगर नहीं है तो क्या संविधान भाजपा तय करेगी या संविधान को बदलने की तैयारी है?
इस देश में रहने वाले सभी जन को अपने और अपने समाज की चिंता का पूरा हक़ है, और अगर इसे कोई भी हटाने की कोशिश करेगा तो वह सरकार से उखाड़ के फेंक दिया जाएगा.

आपको हम यह भी बता दें कि, गौरक्षा वगैरा ये सब भाजपा के ड्रामे मात्र है, भाजपा बता दे कि, पिछले साढ़े 4 सालों में कितने प्रदेशों में गौकशी न होने का कानून पास कराया है अब तक? 20 राज्यों और केंद्र में सरकार होने के बावजूद।

और नहीं तो भाजपा के नेता/ मंत्री यह बोलते हैं कि, बीफ कि कमी हो जाए तो अन्य प्रदेशों से मंगा देंगे पर कमी नहीं होने देंगे… मेघालय में तो भाजपा ने यहां तक बोल दिया कि, अगर सरकार बन गई तो गौमांस सस्ता करा देंगे.

 

   

 

ये तो दोगला प्रवित्ति है BJP की, कहीं पर गाय को मम्मी और कहीं पर यम्मी!
इससे भाजपा का चाल और चरित्र है साबित होता है!

अंततः मैं यह कहना चाहूंगा कि, हां मेरे परिवार को भी डर लगता है… क्योंकि देश का माहौल बिगड़ा है पर इसे सुधारने के लिए हम और आप के साथ साथ सरकार को भी मशक्क़त करना होगा… वरना कैसे सुरक्षित रहेंगे भारतवासी?

 

 

जय हिन्द.

जल्दी मिलते हैं नए लेख के साथ.

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सौरभ राय.
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Categories: Opinion