Budget 2019: राजीव गांधी के इस कदम से भर गया था सरकार का खजाना

Budget 2019: राजीव गांधी के इस कदम से भर गया था सरकार का खजाना

करीब 32 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए वित्त मंत्री के तौर पर बजट पेश किया था.

 

हर सरकार सरकारी खर्चों के लिए राजस्व के नए तरीके खोजती है. हालांकि इसके लिए उस पर यह दबाव भी बना रहता है कि आम लोगों पर अधिक भार न पड़े. ऐसे ही करीब 32 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए वित्त मंत्री के तौर पर बजट पेश किया था. उन्होंने जो बजट पेश किया, उससे न सिर्फ उस समय सरकार को राजस्व का नया स्रोत मिला बल्कि उनके बाद आने वाली सरकारों के लिए भी यह आय का स्रोत बन गया. राजीव गांधी ने 1987 के फरवरी महीने के अंत में एक बजट पेश किया जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में मील का पत्थर बन गया.

पहली बार मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स का प्रावधान
1987 में बजट पेश करते हुए प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने Minimum Corporate Tax का प्रावधान किया. उस दौर में कई बड़ी कंपनियां बड़ा मुनाफा कमाती थीं और शेयरधारकों को डिविडेंड्स भी देती थीं लेकिन टैक्स बहुत कम भरती थीं या भरती ही नहीं थीं. 1987 में पेश किए गए बजट में प्रावधान किया गया कि अब सभी कंपनियों को अपने बुक प्रॉफिट का 15 फीसदी टैक्स भरना ही होगा. इसका आइडिया अमेरिका से लिया गया था. 1987 के बजट से सरकारी खजाने को इस टैक्स से 75 करोड़ रुपए के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद थी.

वर्तमान में 25 से 30 फीसदी के बीच कॉरपोरेट टैक्स

राजीव गांधी द्वारा शुरू किया गया कॉरपोरेट टैक्स राजस्व का सबसे बड़ा जरिया बन गया. इस समय कॉरपोरेट टैक्स कंपनियों के टर्नओवर के हिसाब से 25 से 30 फीसदी के बीच है. 250 करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना होता है

राजीव गांधी ने क्यों पेश किया बजट
पीएम बनने के बाद राजीव गांधी ने वीपी सिंह को वित्त मंत्री बनाया था. इंडियन कॉरपोरेट घरानों के यहां रेड डालने के बाद उठे विवाद के कारण उन्हें वित्त मंत्री के पद से हटाकर रक्षा मंत्रालय दे दिया गया. आगे किसी विवाद की संभावना को खत्म करने के लिए राजीव गांधी ने वित्त मंत्रालय का प्रभार अपने पास रखा.

एक बयान की वजह से बने मिस्टर क्लीन
राजीव गांधी प्रचंड बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने थे. पीएम बनने के बाद उन्होंने सुधारों की नीति अपनाई. वह देश के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पब्लिकली यह स्वीकार किया कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार चरम पर है. उनका यह बयान आज भी याद किया जाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार आम आदमी के लिए एक रुपये भेजती है लेकिन आम आदमी को सिर्फ 15 पैसे ही मिलते हैं. इस स्वीकारोक्ति के कारण ही उन्हें ‘मिस्टर क्लीन’ कहा गया.

Courtesy: news18.com

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