आगरा के शू कारोबारियों की दुखभरी दास्तां: जीएसटी ने मार डाला, चीन ने हमें बचा लिया

आगरा के शू कारोबारियों की दुखभरी दास्तां: जीएसटी ने मार डाला, चीन ने हमें बचा लिया

आगरा में 18 अप्रैल 2019 को दूसरे चरण का लोकसभा चुनाव है। ऐसे में हम आगरा के शू मार्केट हींग की मंडी के हालात का जायजा लेते हैं. जो चमड़े के जूते बनाने के लिए फेमस है। आगरा में करीब 5000 शू मेकिंग यूनिट हैं। इसमें से करीब 60 प्रतिशत जाटव समुदाय की है, जबकि 30 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय की हैं। इसमें काम करने वाले 95 प्रतिशत मजदूर भी जाटव समुदाय के हैं। शू मेकिंग के करोबार से करीब 3 लाख लोग जुड़े हैं। लेकिन  जीएसटी और नोटबंदी की वजह से इनमें से काफी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। 

जिया इंटरप्राइजेज के मालिक शरवन सिंह जाटव की चमड़े के जूते बनाने की दुकान है, जो बिग बून ब्रांड के तहत जूते बनाते हैं। शरवन अपने व्यापार के नुकसान के लिए जीएसटी को जिम्मेदार मानते हैं। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक शरवन बताते हैं कि जीएसटी से पहले 499 रुपए तक के फुटवियर रिटेलिंग पर कोई टैक्स नहीं था। वहीं 499 रुपए से ज्यादा कीमत वाले जूतों पर इनपुट कास्ट पर मात्र 14 प्रतिशत वैट लगता था। इसमें से लेदर पर 5 प्रतिशत, सोल पर 6 प्रतिशत और शाल्यूशन (गोंद) पर 12 प्रतिशत था। हालांकि जीएसटी आने के बाद से लेदर पर 12 प्रतिशत, सोल और शॉल्यूशन पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूली जा रही है, जो कि बड़े उद्योपतियों के लिए ठीक है लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए यह काफी ज्यादा है। शरवन ने जीएसटी को बड़े पूजीपतियों को फायदा पुहंचाने वाला बताया। शरवन के मुताबिक छोटे ट्रेडर्स के लिए जीएसटी फाइल करने के लिए चार्डर अकाउंट रखना पड़ता है, जो एक एक्सट्रा खर्च है। शरवन बताते है कि पहले वो दिन में करीब 500 से 600 जूतों बनाते थे, जो अब कम होकर मात्र आधे रह गए हैं।

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