जेट एयरवेज के बंद होने से सड़क पर आ गए हजारों कर्मचारी, बच्चों की फीस और घर के किराए की सता रही चिंता

जेट एयरवेज के बंद होने से सड़क पर आ गए हजारों कर्मचारी, बच्चों की फीस और घर के किराए की सता रही चिंता

पिछले चार साल से नकद धन के संकट से जूझ रही निजी क्षेत्र की एयरलाइन जेट एयरवेज ने अंतत: बुधवार (17 अप्रैल) को परिचालन अस्थायी तौर पर स्थगित करने की घोषणा कर दी। पिछले ढाई दशक से भी अधिक समय से सेवाएं दे रही इस एयरलाइन ने कहा है कि आज ही मध्यरात्रि को अमृतसर से नई दिल्ली की उसकी उड़ान के बाद उसका परिचालन फिलहाल बंद किया जा रहा है।

गहन आर्थिक संकट से जूझ रही विमानन कंपनी जेट एयरवेज का परिचालन निलंबित होने के बाद उसके करीब 22 हजार कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं। इनमें विमान में माल लादने वाले ऐसे कर्मचारी भी हैं जिन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रख दिए हैं, ऐसे इंजीनियर शामिल हैं जिन्होंने अपनी गाड़ियां बेच दीं और ऐसे भी कर्मचारी शामिल हैं जो अपना नियमित मासिक भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।

कंपनी में पिछले 24 साल से काम कर रहे चंद्रशेखर मंडल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘‘मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि मेरे पास काम नहीं बचा है। उम्मीद करता हूं कि कंपनी फिर से परिचालन शुरू करेगी।’’ उन्होंने सरकार से भी मांग की है कि कंपनी का परिचालन जल्द शुरू किया जाना चाहिए। कर्मचारियों को बच्चों की स्कूल, कॉलेज फीस चुकाने की चिंता है। उन्हें नहीं पता कि घर का किराया कहां से चुकाएंगे।

उन्हें अपनी सभी समस्याओं का उत्तर केवल इसी में दिखाई देता है कि रिणदाता बैंक कंपनी को उसकी त्वरित जरूरत के लिए धन उपलब्ध कराएं ताकि जेट एयरलाइन फिर से परिचालन शुरू कर सके। कंपनी में 24 साल से ड्राइवर का काम कर रहे सुनील कुमार ने कहा कि रोजाना के खर्चों का प्रबंध करना भी मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि उनके कई सहकर्मियों ने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए पत्नी के गहने गिरवी रख दिए हैं।एक वरिष्ठ पायलट ने इस मौके पर कहा कि कंपनी के इस हालात के लिये प्रबंधन और सरकार के बीच वित्त पोषण को लेकर संवाद में पारदर्शिता का अभाव रहा है। जेट के सैकड़ों कर्मचारियों ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में मौन प्रदर्शन किया और एयरलाइन का परिचालन जल्द शुरू करने की मांग की।

आर्थिक संकट से जूझ रही कंपनी

इस एयरलाइन के बैंकों के समूह ने उसे 400 करोड़ रुपये का आपतकालीन कर्ज देने से इनकार कर दिया। वित्तीय सहारे के अभाव में उसके प्रबंधकों को बची खुची सभी उड़ाने बंद करने का यह निर्णय लेना पड़ा। पट्टे के विमानों का किराया न चुका पाने के कारण उसकी उड़ानों की संख्या पहले ही बहुत सीमित रह गई थी। जेट एयरवेज ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा है, ‘‘हम अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने के लिये मजबूर हैं। एयरलाइन की आज मध्यरात्रि को आखिरी उड़ान का परिचालन होगा।’’

एयरलाइन ने कहा कि रिणदाता बैंक की ओर से उसे परिचालन में बनाये रखने के लिये जरूरी कर्ज देने से इनकार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। जेट एयरवेज ने कहा, ‘‘कर्जदाताओं और अन्य किसी भी स्रोत से आपातकालीन कोष उपलब्ध नहीं होने से ईंधन और दूसरी अहम सेवाओं का भुगतान नहीं कर पाने की वजह से एयरलाइन अपने परिचालन को जारी रखने में सक्षम नहीं हो पाएगी।’’

जेट एयरेवज की मंगलवार को हुई निदेशक मंडल की बैठक में प्रबंधन ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय दुबे को रिणदाता बैंकों से 400 करोड़ रुपये का आपात कोष उपलब्ध कराने की आखिरी बार अपील करने के लिए प्राधिकृत कर दिया। निदेशक मंडल ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांग स्वीकार नहीं की जाती है तो वह बुधवार को एयरलाइन के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला ले सकते हैं।

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