तेज बहादुर ने दाल का वीडियो बनाया था, इन फौजियों ने अंडे और टमाटर का बनाया है

तेज बहादुर ने दाल का वीडियो बनाया था, इन फौजियों ने अंडे और टमाटर का बनाया है

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में सेना के तीन जवान दिख रहे हैं. वीडियो किसी सेना के ही जवान ने बनाया लगता है. वीडियो देखकर ये पता चलता है कि सेना के जवान किस मुश्किल में अपनी ड्यूटी निभाते हैं. जो कि शायद ये वीडियो बनाने का मकसद भी है. वीडियो में सेना का एक जवान ये कहते भी पाया जाता है कि ‘सेना की ड्यूटी इतनी आसान भी नहीं होती’. क्यों बनाया गया ये वीडियो वगैरह सवालों पर बाद में आएंगे. पहले आप वो वीडियो देख लें, जिस पर ये सारी ख़बर है.

# क्या है इस वीडियो में 

इस वायरल वीडियो में सेना के ये जवान आलू, टमाटर, अंडे, अदरक वगैरह दिखा रहे हैं. क्यों दिखा रहे हैं? क्योंकि ये सब सामान ठीक वैसा नहीं है जिसा कि आमतौर पर हमारे घरों में होता है. ऑमलेट बनाना होता है तो कैसे चट्ट से कटोरी पर मारकर आप अंडा फोड़ लेते हैं. लेकिन यहां ये जवान इन अंडों पर दम भर हथौड़ी चला रहे हैं तब भी नहीं फूट रहा है. टमाटर और आलू का भी वही हाल है.

# लेकिन ऐसा है क्यों?

वो तो वीडियो में दिख ही रहा है. सेना के ये जवान हमारी आपकी तरह मैदानी इलाकों में नहीं खड़े हैं. ये जवान खड़े हैं सियाचीन सीमा पर. और यहां पड़ती है ठण्ड. मफ़लर स्वेटर वाली नहीं. आत्मा को भी जमा कर बर्फ़ कर देने वाली ठण्ड( लिटरली नहीं ). माइनस 40 से माइनस 70 तक पहुंच जाता है तापमान. और तापमान से ताप एकदम से ग़ायब हो जाता है. तो ऐसी हालत में रह रहे जवानों ने अपनी मुश्किल दिखाने के लिए ये वीडियो बनाया. जिसका सारतत्व है कि हमारा काम इतना भी आसान नहीं होता जितना आप सोचते हैं.

सियाचीन की मुश्किलों का अंदाज़ा इस बात से लगा लीजिए कि वहां इतनी बर्फ़ होती है कि अगर दिन में सूरज चमके और उसकी चमक बर्फ़ पर पड़ने के बाद आँखों में जाए तो आँखों की रोशनी जाने का ख़तरा. अगर तेज़ चलती हवाओं के बीच रात में बाहर हों तो चेहरे पर हज़ारों सुइयों की तरह चुभते, हवा में मिलकर उड़ रहे बर्फ़ के छोटे-छोटे टुकड़े. इन हालात में सैनिक कपड़ों की कई तह पहनते हैं और सबसे ऊपर जो कोट पहनते हैं उसे “स्नो कोट” कहते हैं.

# नींद में भी हो जाती है मौत 

सैनिक लकड़ी की चौकियों पर स्लीपिंग बैग में सोते हैं, मगर ख़तरा सोते समय भी मँडराता रहता है क्योंकि ऑक्सीजन की कमी की वजह से कभी-कभी सैनिकों की सोते समय ही जान चली जाती है. इस स्थिति से बचाने के लिए वहाँ खड़ा संतरी उन लोगों को बीच-बीच में उठाता रहता है और वे सभी सुबह छह बजे उठ जाते हैं. वैसे उस ऊँचाई पर ठीक से नींद भी नहीं आती.

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