हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठी कांग्रेस, इस नए मास्टर प्लान से शुरू होगा काम

हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठी कांग्रेस, इस नए मास्टर प्लान से शुरू होगा काम

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अध्यक्ष पद छोड़ने के एलान के बाद से कांग्रेस में भले ही ऊपरी तौर पर ख़ामोशी का आलम दिख रहा है लेकिन पार्टी सूत्रों की माने तो ये ख़ामोशी यूँ ही नहीं है बल्कि कांग्रेस की कायापलट के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।

इस मास्टर प्लान में नए चेहरों को पार्टी में ऊपर लाने से लेकर पार्टी के बुज़ुर्ग नेताओं की एक अलग मार्गदर्शन समिति बनाये जाने का प्लान शामिल है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कम से कम एक साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी नहीं लेना चाहते। इसकी जगह वे एक वर्ष तक देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संवाद करना चाहते हैं।

वहीँ सूत्रों ने कहा कि यदि किसी तरह राहुल गांधी अध्यक्ष पद पर बने रहने को तैयार हो गए तो उनके नीचे कम से कम दो और अधिक से अधिक चार कार्यकारी अध्यक्षों की न्युक्ति किये जाने संभावना है।

दस जनपथ के करीबी सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की देखरेख में तैयार हुए इस मास्टर प्लान में संगठन में व्यापक स्तर पर फेरबदल भी शामिल है। इतना ही नहीं संगठन को धारदार और एक्टिव बनाने के लिए बड़े राज्यों को तीन से चार सेक्टरों में बांटकर प्रत्येक राज्य में प्रदेश अध्यक्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्षों की न्युक्ति के अलावा कई जिलों को मिलाकर एक कोर्डिनेटर की न्युक्ति का प्रस्ताव है।

सूत्रों ने कहा कि चुनाव में राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों से गठबंधन के लिए अब पहले से ही एक कमेटी निर्धारित कर दी जाएगी। जो राज्यों में गठबंधन के लिए संभावित दलों से सम्पर्क में रहेगी। जिससे एन चुनाव के समय सीटों के बंटवारे और गठबंधन को लेकर कोई संशय पैदा न हो।

पार्टी सूत्रों की माने तो कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को सिंगल हैण्ड उत्तर प्रदेश का नेतृत्व दिए जाने की तैयारियां हो चुकी और उत्तर प्रदेश में पार्टी जल्द 2022 के चुनावी मोड में नज़र आएगी।

सूत्रों ने कहा कि ईवीएम को लेकर पार्टी आर पार की लड़ाई का मूड बना रही है और इसके लिए विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। सूत्रों की माने तो 2019 के चुनाव के दौरान कांग्रेस के डेटा विश्लेषक टीम ने साफ़ तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को यह सन्देश दिया था कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कम से कम 184 सीटें मिल रही हैं। डेटा विश्लेषक टीम ने यह भी दावा किया था कि यदि चुनाव में बहुत बड़ा उलटफेर हुआ तब भी कांग्रेस को कम से कम 164 सीटें मिलेंगी।

वहीँ जब चुनाव परिणाम आये तो कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक साबित हुआ। कांग्रेस की डेटा विश्लेषक टीम आज भी इस बात को कतई मानने को तैयार नहीं है मतदाताओं ने कांग्रेस उम्मीदवारों को वोट नहीं दिया।

सूत्रों ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के डेटा एनालिस्ट प्रवीण चक्रवर्ती ने कांग्रेस की सीटें अनुमान से बहुत कम आने के लिए साफतौर पर ईवीएम को दोषी ठहराया। सूत्रों ने कहा कि डेटा एनालिस्ट टीम से बातचीत के बाद अब कांग्रेस ईवीएम के खिलाफ आरपार की लड़ाई का मन बना रही है।

सूत्रों की माने तो इस वर्ष होने जा रहे महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा और सिक्किम के विधानसभा चुनावो के लिए अधिसूचना जारी होने से पहले कांग्रेस ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराये जाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस के मास्टर प्लान में फ्रंटल संगठनों की भूमिका सुनिश्चित करने से लेकर क्षेत्रवार उन कार्यकर्ताओं की सूचियां तैयार करने का काम शामिल है जो पार्टी के वफादार हैं और जिन्होंने कभी पार्टी नहीं छोड़ी।

सूत्रों ने कहा कि इस महीने के अंत तक कांग्रेस के नए मास्टर प्लान पर काम शुरू हो जायेगा। संगठन में आवश्यक न्युक्तियों के साथ साथ पुराने नेताओं से बड़ी ज़िम्मेदारियाँ वापस लेकर उनकी जगह नए चेहरों को पार्टी में उच्च पदों पर लाया जाएगा।

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