मोदी सरकार अर्थशास्त्रियों को नहीं आ रही रास, पनगढ़िया से लेकर विरल आचार्य तक ने छोड़ा साथ

मोदी सरकार अर्थशास्त्रियों को नहीं आ रही रास, पनगढ़िया से लेकर विरल आचार्य तक ने छोड़ा साथ

‘मैं गरीबों का रघुराम राजन हूं’ कहने वाले विरल आचार्य ने आरबीआई के डिप्टी गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया है। लगभग सात महीने पहले आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने निजी वजह बताते हुए इस्तीफा दिया था। इस बीच और भी कई अर्थशास्त्री मोदी सरकार से बिदकते दिखाई दिए। कारण जो भी हो लेकिन अब इस बात की चर्चा तेज है कि मोदी सरकार अर्थशास्त्रियों को रास नहीं आ रही है।

विरल ने कार्यकाल पूरा होने से 6 महीने पहले ही अपना पद छोड़ने का फैसला किया है। विरल ने 23 जनवरी, 2017 को आरबीआई में बतौर डिप्टी गवर्नर पद संभाला था। नोटबंदी के बाद जब बैंक चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहा था तब विरल बैंक से जुड़े थे। वो उदारीकरण के बाद आरबीआई के अब तक के सबसे युवा डिप्टी गवर्नर थे। ये पद संभालने के वक्त वो 42 साल के थे।

इस हफ्ते की शुरुआत में, इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया था कि आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास और आचार्य ने मौद्रिक नीति निर्णयों के मुद्दों पर लगातार दूसरी बार अलग-अलग राय दी थी। दास का मानना था कि पब्लिक सेक्टर कंपनियों (पीएसयू) के कर्जों को राजकोषीय घाटे में शामिल करना सही नहीं होगा, वहीं विरल का मानना था कि इस कर्ज को राजकोषीय घाटे में शामिल करना चाहिए क्योंकि ये कुल घाटे में प्रभाव डालता है।

26 अक्टूबर, 2018 को विरल के एक भाषण ने काफी सुर्खियां बंटोरी थी। अपने 90 मिनट लंबे भाषण में विरल ने कहा था कि सरकार रिजर्व बैंक की स्वायत्ता से समझौता ना करे। विरल ने चेताया था कि अगर केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता से समझौता किया गया तो ये अर्थव्यवस्था में तबाही ला सकता है। उन्होंने कहा था कि जो सरकार केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती है उसे वित्तीय बाजार की नाराजगी सहनी पड़ती है। जो सरकार केंद्रीय बैंक को आजादी से काम करने देती है, उस सरकार को कम लागत पर उधारी और इंटरनेशनल निवेशकों का प्यार मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी सरकार का कार्यकाल भी लंबा रहता है। रिजर्व बैंक की स्वायत्तता बरकरार रखने में कुछ जरूरी क्षेत्र हैं जो अभी कमजोर हैं।

विरल से पहले कई अर्थशास्त्रियों ने छोड़ा मोदी सरकार का साथ-

उर्जित पटेल

पिछले साल के आखिर में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया था। पटेल ने अपने इस्तीफे के पीछे निजी वजह बताई थी। लेकिन गवर्नर उर्जित पटेल और केंद्र सरकार के बीच कई मुद्दों पर मतभेद और तनातनी की खबरें भी उस दौरान आई थी। उनके इस्तीफे के पीछे खासतौर पर आरबीआई के कोष और इसकी स्वायत्तता को लेकर सरकार से गतिरोध को कारण माना गया।

अरविंद सुब्रमण्यन

अरविंद सुब्रमण्यन ने जून 2018 में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद से इस्तीफा दिया था। उनके पद छोड़ने से पहले ही केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पर लिखे एक पोस्ट में कहा था कि मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने पारिवारिक वजहों के चलते अमेरिका लौटने का निर्णय किया है, और उनके पास अरविंद सुब्रमण्यन की बात मान लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। इसके बाद उन्होंने अरविंद सुब्रमण्यन के सरकार के साथ सफर का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद भी दिया और सुब्रमण्यन ने पद छोड़ते वक्त अरुण जेटली को ड्रीम बॉस बताया था।

लेकिन हाल ही में उन्होंने देश की आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी को लेकर सवाल उठाया। हावर्ड यूनिवर्सिटी ने उनका एक शोध पत्र (रिसर्च पेपर) प्रकाशित किया है, जिसमें देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किए जाने का दावा किया गया। सुब्रमण्यम के अनुसार सरकार की ओर से जो आंकड़े पेश किए गए, वह झूठे थे। इस रिसर्च पेपर में अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2016-17 के दौरान देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। इतना ही नहीं देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम ने पिछले साल नोटबंदी के फैसले को देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया था।

अरविंद पनगढ़िया

अरविंद पनगढ़िया ने जून 2017 में नीति आयोग के उपाध्यक्ष का पद छोड़ा था। मोदी सरकार ने पनगढ़िया को जनवरी 2015 में नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष बनाया गया था। भारतीय-अमरीकी अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने इस्तीफे के पीछे कोलंबिया यूनिवर्सिटी की नौकरी को कारण बताया था। पनगढ़िया ने कहा था कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी उन्हें और एक्सटेंशन नहीं दे रहा।

सुरजीत भल्ला

अर्थशास्त्री और अखबारों में कॉलम लिखने वाले सुरजीत भल्ला ने पिछले साल दिसंबर में इस्तीफा दिया था। वह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद की पार्ट-टाइम सदस्य थे। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से पद छोड़ने की जानकारी देते हुए कहा था, “मैने पीएमईएसी की पार्ट-टाइम सदस्यता से मैंने एक दिसंबर को इस्तीफा दे दिया है।”

Courtesy: outlookhindi.

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