प्‍याज का सिग्‍नल ‘बाजार’ में दोबारा अलर्ट मोड पर, 80 रुपये प्रति किलो भाव ने बिगाड़ा लोगों का मिजाज

प्‍याज का सिग्‍नल ‘बाजार’ में दोबारा अलर्ट मोड पर, 80 रुपये प्रति किलो भाव ने बिगाड़ा लोगों का मिजाज

वाराणसी, जेएनएन। प्याज ने जन-सामान्य का दीवाली बाद एक बार फिर से दीवाला निकालने का मन बना लिया है, वहीं थाली में प्‍याज ने जो आग लगाई है उससे आम जनता का मिजाज बिगड़ गया है। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने राहत देने के लिए शहर में कई सरकारी सस्‍ते प्‍याज का स्‍टाल लगाया मगर कुछ दिनों के बाद गुपचुप तरीके से ताला लगाकर अधिकारी भी चलते बने।

वहीं दूसरी ओर सोमवार को पहडिय़ा थोक मंडी में प्याज 65 रुपये तो फुटकर बाजार में 80 रुपये प्रति किलो बिका। वहीं मंगलवार की सुबह भी बाजार में इसी भाव से प्‍याज ने अपना खाता खोला। कारोबारियों के अनुसार नासिक में बारिश के कारण प्याज का भाव 48 घंटे में 30 रुपये किलो तक बढ़ गया है, ऐसे में प्‍याज की देर से अापूर्ति की संभावनाओं के बीच प्‍याज की कीमत में आग लगना तय है।


दीवाली बाद एक बार फिर से दीवाला निकालने का मन बना लिया है वहीं थाली में प्‍याज ने जो आग लगाई है उससे आम जनता का मिजाज बिगड़ गया है।

बंगलौर का प्याज दे रहा दगा: इस मौसम में अमूमन हर साल बंगलौर का प्याज ही मोर्चा संभालता था। लेकिन अबकी गुणवत्ता खराब होने से प्याज बनारस पहुंचने से पूर्व ही खराब हो जा रहा है। वहीं दक्षिण भारत में लगातार हो रही बारिश ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मंडी में इन दिनों अच्छे प्याज का टोटा है। थोक बाजार में दो से तीन दिन पूर्व ही प्याज की कीमत 40 से 45 रुपये प्रतिकिलो था।

सरकारी स्टालों पर लगा ताला : उत्‍तर प्रदेश सरकार ने प्याज के भाव पर नियंत्रण बनाए रखने को पहडिय़ा मंडी में स्टाल खोलने का आदेश दिया था। स्टाल खुलने का असर फुटकर बाजार में दिखा भी, लेकिन हालात सामान्य होने से पूर्व ही सरकारी स्टाल पर ताला लग गया और कर्मचारी भी अतिरिक्‍त काम को बोझ मानकर चलते बने। अब 80 रुपये तक प्‍याज का भाव पहुंचने के साथ ही जनता के माथे पर बल पड़ने लगा है वहीं मंडी में भी दामों ने फुटकर दुकानदारों को सोचने पर विवश कर दिया है।

बोले मंडी सचिव: मौसम की मार के कारण प्याज के फसल पर महंगाई आई है। सरकार के आदेश पर स्टाल लगाए गए थे। फुटकर बाजार में मूल्य काबू हुआ तो स्टाल पर लोगों का आना बंद हो गया था। प्याज पर महंगाई पूरे देश की समस्या है। -डीके वर्मा, मंडी सचिव।

Courtesy: Dainik Jagran

Categories: Finance, India

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